गैर की भावनाओं से संभावनाओं की ओर बढ़ता गैरसैंण,चुनावी वर्ष में सत्र के मंथन से बंधी,स्थाई राजधानी की उम्मीद।
सतपाल महाराज की जिद के साथ ,हरीश रावत ओर त्रिवेंद्र रावत के फैसलों ने दिलाई गैरसैंण को नई पहचान
भराड़ीसैंण (गैरसैंण)-08 मार्च 2026
रिपोर्ट-प्रेम संगेला।
भौगोलिक दृष्टि से गैरसैंण जहां उत्तराखंड का मध्य स्थल है ,वहीं उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी गैरसैंण आंदोलनों की धूरी बना हुआ था। ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने के बाद से अब बदली हुई परिस्थितियों में “गैरसैंण गैर किल्लै ” की भावनाओं से आगे निकलकर अब परिदृश्य “संभावनाओं का गैरसैंण ” में बदलता दिखाई दे रहा है।
ग्रीष्मकालीन राजधानी में अब तक किए गए 8 हजार करोड रुपए के ढांचागत निर्माण के विकास के साथ आगे की संभावनाओं को लेकर गैरसैंणवासियों के साथ ही उत्तराखंड के आम जनमानस की उम्मीदें भी लगातार मजबूत हुई हैं।
बात करें वर्ष 2013 की तो तब कांग्रेस की विजय बहुगुणा सरकार के दौरान उत्तराखंड के कद्दावर नेता सतपाल महाराज की जिद पर भराडीसैंण में विधानसभा के भूमि पूजन ने तब शुरुआती खूंटा गाडने का काम कर दिया था । जिसके बाद वर्ष 2015 में तब हरीश रावत की सरकार ने भराड़ीसैंण की कुल 47 एकड भूमि पर विधानसभा परिसर का निर्माण शुरू करवाया। जिसने पहाडी क्षेत्रों के साथ ही उत्तराखंड के आंदोलनकारीयों की भावनाओं को संजीवनी देने का काम किया था ।
इसके साथ ही अब तक यहां विधानसभा के मुख्य भवन के साथ मंत्रियों ,विधायकों ,अधिकारियों व कर्मचारियों के आवास भी तैयार कर लिए गये हैं । हेलिपेड निर्माण के साथ ही डबल लेन सड़क निर्माण , पेयजल , विधुत व पार्किंग की बेहतर व्यवस्थाएं भी कर ली गयी हैं। वर्तमान में महिला कर्मचारी हॉस्टल व मिडिया आवास का कार्य प्रगति पर है। इन ढांचागत निर्माणों के बीच भी “गैरसैंण गैर किल्लै” के तंज का जबाब देते हुए भाजपा के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने 2020 में विपक्षियों सहित अपनी ही पार्टी को चौंकाते हुए गैरसैंण -भराडीसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया ।
त्रिवेंद्र रावत की इस घोषणा ने गैरसैंण के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलने का काम किया।
वर्तमान में पुष्कर सिंह धामी सरकार की बात करें तो विधानसभा परिसर के अंतर्गत चल रहे कुछ आवश्यक कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ ही नजदीकी गांवों के विकास पर तो काम करते दिखाई दिए ,लेकिन बीते 5 सालों में उम्मीदों के अनुरूप कोई बडा फैसला न लिए जाने से स्थाई राजधानी को लेकर मायूसी ही हाथ लगी है। अब तक भराडीसैंण में सचिवालय निर्माण की स्वीकृति न मिलने से भी आमजन इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी की उपेक्षा के रूप में देखता आया है ।कुल 13 में से 10 पहाडी जिलों वाले राज्यवासी पिछले 5 साल से धामी सरकार में गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित किए जाने का इंतजार कर रहे हैं,जिसको लेकर अब चुनावी वर्ष में 9 मार्च से 13 मार्च तक भराडीसैंण में आयोजित होने जा रहे बजट सत्र में एक बार फिर आमजन को सत्र के मंथन से कोई निर्णायक फैसला आने की उम्मीद है।
