गैरसैंण में तैनात महिला रोग विशेषज्ञ का फरमान सिर्फ गर्भवती महिलाओं की करेंगी जांच,नियुक्ति के 48 दिनों के दौरान हुए 23 प्रसवों में नहीं पंहुची प्रसव कक्ष तक,अब उल्टा अधीक्षक ओर सीएमओ पर मानसिक उत्पीड़न का लगाया आरोप।

गैरसैंण में तैनात महिला रोग विशेषज्ञ का फरमान सिर्फ गर्भवती महिलाओं की करेंगी जांच।

नियुक्ति के 48 दिनों के दौरान हुए 23 प्रसवों में नहीं पंहुची प्रसव कक्ष तक,अब उल्टा अधीक्षक ओर सीएमओ पर मानसिक उत्पीड़न का लगाया आरोप।

गैरसैंण-18 मार्च 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.

ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कभी डाक्टरों की कमी तो अब डाक्टरों की मनमर्जी को लेकर चर्चाओं में बना हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं से परेशान आमजन पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों,तकनीशियनों व तकनीकी उपकरणों की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन करता रहा। बडी मुश्किलों के बाद मिले विशेषज्ञ डॉक्टर अब अपनी मर्जी से मरीजों को देखने की बात करने लगें, तो दोनों ही परिस्थितियों में खामियाजा आमजन को ही भुगतना पड रहा है। दरअसल कुछ माह पूर्व ही यहां तैनात महिला रोग विशेषज्ञ शिल्पा दास मुरूकुटे ने अपने कक्ष के बाहर बकायदा बोर्ड लगाकर सिर्फ गर्भवती महिलाओं को देखने का फरमान चस्पा कर दिया है,जिसके चलते दूर दराज क्षेत्रों से बडी उम्मीदें लेकर अस्पताल पंहुच रही महिला रोगी भी असमंजस में हैं,कि अब अपनी स्वास्थय समस्या लेकर किसके पास जाएं।

उल्लेखनीय है की गैरसैंण क्षेत्र के लोगों ने बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं से परेशान होकर विशेषज्ञ डॉक्टर तकनीशियन व तकनीकी उपकरणों की मांग को लेकर पिछले 5 वर्षों में दर्जनों बार आंदोलन किए। जिसके बाद बड़ी मुश्किल से यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों में शामिल महिला रोग,बाल रोग,हड्डी रोग व निश्चेतक विशेषज्ञ की नियुक्ति की गई। जिनमें से महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती 30 जनवरी 2026 को की गई,लेकिन आजकल महिला रोग विशेषज्ञ शिल्पा दास मुरूकुटे अपने ही तरीके से अस्पताल चलाने को लेकर चर्चाओं में बनी हुई है,जहां उन्होंने अपने कक्ष के बाहर बकायदा फरमान चस्पा किया हुआ है,कि वे सिर्फ गर्भवती महिलाओं की ही जांच करेंगी। महिला डाक्टर की मनमर्जी का आलम यह है की उनकी तैनाती के 48 दिनों के भीतर हुई कुल 23 डिलीवरी में से एक में भी उनकी उपस्थिति प्रसव कक्ष में ना होना सवाल खड़े करता है।अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इस दौरान केवल तीन मामलों में ही उनके द्वारा टेलिफोनिक राय दी गई,जबकि सरकारी आवास अस्पताल से एकदम सटा हुआ है। उसके बाउजूद भी विशेषज्ञ डॉक्टर का गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के दौरान प्रसव कक्ष में न पहुंचना ड्यूटी के नाम पर केवल खानापूर्ति ही कही जा सकती है.जिसको लेकर आमजन का स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति पहले से बिगडा हुआ विश्वास ओर खराब होता जा रहा है।

वहीं महिला डाक्टर के ऐसे व्यवहार से अस्पताल प्रबंधन भी परेशान है। इसके उलट मामले में महिला रोग विशेषज्ञ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर चिकित्सा अधीक्षक गैरसैंण ओर मुख्य चिकित्सा अधिकारी चमोली पर ही मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए महिला आयोग तक में शिकायत दर्ज करवाई है।

मामले को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैरसैंण के चिकित्सा अधीक्षक  डॉक्टर अर्जुन रावत ने बताया कि चिकित्सक की नियुक्ति संविदा के तहत “यू क्वीट -वी पै ” योजना में हुई है। जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 11 महीने का अनुबंध विभाग द्वारा किया जाता है। इस योजना में डाक्टरों की तनख्वाह भी सरकार द्वारा अलग से स्वीकृत की जाती है। उनकी तनख्वाह को लेकर जरूरी कागज सेंट्रल ट्रेजरी को भेज दिए गए हैं. संभवतः तनख्वाह में देरी को लेकर ही डॉक्टर नाराज चल रही है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टर डिलीवरी के समय भी बुलाने के बावजूद प्रसव कक्ष में नहीं पहुंचती हैं,जबकि कुछ मामलों में डिलीवरी हो जाने के बाद ही वह मौके पर पहुंची हैं,जिसको लेकर पूरा प्रकरण उच्च अधिकारियों के संज्ञान में डाल दिया गया है। उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर अर्जुन रावत ने कहा की मामले की सूचना पहले ही उपजिलाधिकारी गैरसैंण व कोतवाली में दे दी गयी है। जिसमें अस्पताल के सभी डॉक्टरों सहित अन्य स्टाफ ने भी समस्याओं से अवगत करवाया है।

मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी चमोली अभिषेक गुप्ता ने कहा की महिला डाक्टर की कार्य में लापरवाही की शिकायत से विभाग के उच्च अधिकारियों व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन विभाग को भी अवगत करवा दिया गया है, जिनके निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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