तो क्या उत्तराखंड में समय से पहले हो सकते है विधानसभा चुनाव?
गोपेश्वर (चमोली)-15 अप्रैल 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट.
तो क्या उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव समय से पहले इसी साल होंगे। भाजपा द्वारा उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजाने के चलते इस बात के साफ संकेत मिलने लगे हैं।
दरअसल उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव 2027 में होने हैं। इसके बावजूद भाजपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारी जोर शोर से प्रारंभ कर दी है। अगले साल हरिद्वार में कुंभ के चलते फरवरी अथवा मार्च में विधानसभा चुनाव कराने के लिए दिक्कतें आ खड़ी हो सकती है। 14 जनवरी 2027 को हरिद्वार कुंभ का माघ स्नान होने के साथ ही कुंभ का आगाज होगा। इसके चलते माना जा रहा है कि कुंभ से पहले ही इसी साल राज्य में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। भाजपा ने तो कांग्रेस के मुकाबले चुनावी तैयारियां अभी से तेज कर दी है। वैसे 2022 में विधानसभा का कार्यकाल 23 मार्च को समाप्त हो गया था। इसके चलते पांच साल बाद यानि 23 मार्च 2027 तक विधानसभा का गठन होना संवैधानिक बाध्यता भी है। इसके बावजूद भाजपा ने तो चुनावी रणभेरी बजा दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 हजार करोड़ की लागत से देहरादून-दिल्ली इकोनाॅमिक कारिडोर का लोकापर्ण करने के साथ ही चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इससे पूर्व हरिद्वार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी चुनावी शंखनाद का आगाज कर दिया था। हल्द्वानी में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी जनसभा के जरिए चुनावी आगाज कर दिया था। भाजपा तो इन दिनों कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के साथ तमाम तरह के कार्यक्रम संचालित कर चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है। मंत्रीमंडल विस्तार के साथ ही दायित्वधारियों की फोज खड़ी कर भाजपा ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं।
वर्ष 2022 में 8 जनवरी को विधानसभा चुनाव का एलान कर दिया गया था। इसके साथ ही 21 जनवरी से नामांकन प्रारंभ हो गया था। 31 जनवरी को ही नामवापसी के साथ चुनाव चिह्न आंवटित हो गए थे। इसके तहत 14 फरवरी को मतदान हुआ था। वर्ष 2022 के कार्यक्रम को देखते हुए लगता है कि इस बार हरिद्वार कुंभ के चलते चुनाव अक्टूबर अथवा नवंबर में समय से पूर्व कराए जा सकते हैं। भाजपा की तैयारियों को इसी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की तैयारियां कोई खास नहीं दिखाई दे रही है। अलबत्ता कांग्रेस विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान में जुट कर अपनी सक्रियता प्रदर्शित कर रहे हैं। कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री की दावेदारी को लेकर पिछले दिनों के घटनाक्रम ने सत्ता परिवर्तन की राह देख रहे कार्यकर्ताओं को मायूस किया है। 2022 में भी कांग्रेस के भीतर यही स्थिति देखने को मिली। इसके चलते लोगों ने कांग्रेस का मोह त्याग कर भाजपा का साथ दिया।
2022 के चुनाव में भाजपा को 47 सीटें हासिल हुई और उसका मत प्रतिशत 44.30 रहा। कांग्रेस को 19 सीट मिली तो मत प्रतिशत 37.9 रहा। यानि भाजपा 4.39 प्रतिशत बढ़त बनाने में सफल रह कर दोबारा सत्ता में काबिज हुई। बीएसपी को मात्र दो सीटें ही मिली और उसका मत प्रतिशत 4.82 रहा। आम आदमी पार्टी को कोई सीट हासिल नहीं हुई। दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारी। उनका मत प्रतिशत 3.31 रहा। उक्रांद को एक भी सीट हासिल नहीं हुई किंतु उसका मत प्रतिशत 1.08 रहा। मौजूदा दौर में उक्रांद कांग्रेस तथा भाजपा का विकल्प बनने की राह पर निकल पड़ा है। जन संवाद यात्रा से लेकर अन्य जन सरोकारों से जुड़े मसलों को लेकर उक्रांद संघर्ष की भूमिका में है। इस बार माना जा रहा है कि उक्रांद कुछ चमत्कार करने की स्थिति में है। यह देखना बाकी है कि उक्रांद भाजपा अथवा कांग्रेस जैसे दलों में सेंधमारी कर सकता है।
बहरहाल भाजपा ने जिस तरह चुनावी तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है। उसके चलते अन्य दलों के कान भी खड़े हो गए हैं। अब देखना यह है कि अन्य दल भाजपा के मुकाबले चुनावी तैयारियों को किस तरह अंजाम देते हैं। इस पर उनका सियासी भविष्य निर्भर करेगा।
