मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में जमीन धंसने से गौशालाएं क्षतिग्रस्त,ग्रामीणों ने जान जोखिम में डाल बचाए मवेशी।

मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में जमीन धंसने से गौशालाएं क्षतिग्रस्त,ग्रामीणों ने जान जोखिम में डाल बचाए मवेशी।

खेती की जमीन भी भूस्खलन की चपेट में,उपजिलाधिकारी गैरसैंण व लोनिवि से की सुरक्षा की गुहार।

भराड़ीसैण (गैरसैंण)-05 अगस्त 2026
रिपोर्ट-प्रेम संगेला.

ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर से सटे मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में भारी बरसात के चलते मंगलवार को कई गौशालाएं भूस्खलन की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गयी हैं। ग्रामीणों ने जानजोखिम में डालकर धंसती जमीन के बीच अपने दर्जनभर मवेशियों को निकाल किसी तरह जान बचाई।

मामले को लेकर प्रधान प्रियंका नेगी ने उप जिलाधिकारी गैरसैंण को पत्र लिखकर अतिवृष्टि के चलते दैवीय आपदा से धंसती जमीन की रोक थाम के साथ ही क्षतिग्रस्त गौशालाओं का मुआवजा देने की गुहार लगाई है ।वहीं भूस्खलन से प्रभावित गांव के भ्यौधार क्षेत्र में अन्य गौशालाओं के सुरक्षा उपाय किये जाने की भी मांग की है।

सारकोट भराड़ीसैंण की निर्माणाधीन सड़क के किलोमीटर आठ पर भ्यौधार तोक में चार पशुपालकों की गौशालाएं क्षतिग्रस्त हो गई है। जिनमें मेहरवान सिंह की गौशाला पूरी तरह ध्वस्त हो गयी है ,वहीं दरवान सिंह ,गोविंद सिंह व कुंवर सिंह की गौशालाओं में दरारें पड़ने से स्थिति नाजुक बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है की सड़क निर्माण से जमीन का बड़ा हिस्सा भी लगातार खिसक रहा है ,जिससे गौशालाएं व खेती की जमीन भी बर्बाद हो गई है।

मंगलवार सुबह ग्रामीण जब अपनी गौशाला में पंहुचे तो इस दौरान भूस्खलन शुरू हो गया जिससे आनन-फानन में जान जोखिम में डालकर किसी तरह मवेशियों को बाहर निकाल कर जान बचायी। इसी दौरान एक गौशाला जमीनदोज हो गई ,वहीं अन्य गौशालाओं में भी बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई। ग्रामीण राजेंद्र नेगी ने बताया की गोशालाओं के पीछे की 20 से 25 मीटर की जगह 60 मीटर तक की लंबाई में लगातार खिसक रही है ,जिससे दर्जनभर गोशालाओं सहित 20 नाली से ज्यादा उपजाऊ खेती की जमीन पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।

शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे लोक निर्माण विभाग खंड गैरसैंण के सहायक अभियंता आलोक हटवाल ने मौका मुआयना किया,उन्होंने कहा कि सड़क के नजदीकी गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुई है,वहीं जमीन का बड़ा हिस्सा लगातार धंस रहा है। जिसको लेकर विभाग ने पहले भी सडक की सुरक्षा दीवार बनाई थी। जमीन का बड़ा हिस्सा धंसने से सुरक्षा दिवारें भी क्षतिग्रस्त हो गई है। जमीन की रोकथाम के लिए नया आंगणन तैयार किया जा रहा है। वहीं क्षतिग्रस्त गौशालाओं के मुआवजे को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। सारकोट क्षेत्र के राजस्व उप निरीक्षक विनोद कुमार ने बताया की दैवीय आपदा में गौशाला के मुआवजे का प्रावधान नहीं है। लोक निर्माण विभाग स्तर पर मामले का निस्तारण किया जाना है।

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