हल्द्वानी के बनभूलपुरा तेजाब कांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,दोषियों की उम्र कैद बरकरार।
नैनीताल:-14 अगस्त 2026
उत्तराखंड उच्च न्यायालय में हल्द्वानी के बनभूलपुरा(इंदिरा नगर)इलाके में तेजाब कांड के आरोपियों की निचली अदालत से मिली उम्रकैद की सजा को चुनौती देती याचिका में इसे जघन्य अपराध मानते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायालय ने दोषियों की याचिका को खारिज कर दिया है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने साल 2014 में हल्द्वानी के इंदिरा नगर में आपसी रंजिश के चलते हुए चर्चित एसिड अटैक मामले में अहम फैसला सुनाया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया और दोषी मां-बेटे व अन्य की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि आरोपियों का यह कृत्य जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए सजा में रियायत या माफी की कोई गुंजाइश नहीं बनती है।
यह फैसला न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ द्वारा सुनाया गया। मामले के अनुसार साल 2014 में पड़ोस में रहने वाले इरशाद और उनके परिवार के साथ हुए आपसी विवाद के बाद मोहम्मद जैकी, उसकी मां रहमत जहां और एक नाबालिग ने गुस्से में आकर दुकान से लाकर तेजाब से भरी बोतलें फेंक दी थीं। इस भयानक हमले में कुल 19 लोग प्रभावित हुए थे, जिनमें 5 लड़कियां और एक 18 माह का मासूम बच्चा भी शामिल था। चिकित्सीय जांच में दो डॉक्टरों ने पुष्टि की थी कि हमले में घायल हुए 5 लोगों के घाव और निशान जीवनभर ठीक नहीं हो सकते।
मामले के सत्र परीक्षण के दौरान पेश किए गए 14 गवाहों और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत ने वर्ष 2018 में तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दोषियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि वे लगभग 12 सालों से जेल में हैं और अपनी सजा काट चुके हैं,इसलिए उन्हें रिहा किया जाए। हालांकि, पीड़ितों के वकील दीप चंद्र जोशी ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि एक मासूम बच्चे समेत कई लोगों की जिंदगी बर्बाद करने वाले दोषियों की सजा माफ नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए दोषियों की अपील खारिज कर दी।
