आईएमए (IMA) देहरादून के ट्रेनी कैडेट निशांत धनखड़ की मौत,सपना रह गया अधूरा,सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई।
देहरादून:-17 अगस्त 2026
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से एक दुखद खबर सामने आ रही है, जहाँ पर सैन्य प्रशिक्षण के दौरान हरियाणा के झज्जर निवासी कैडेट निशांत धनखड़ की तबियत बिगड़ने से जिंदगी चली गई। उनकी मौत की सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव कासनी में मातम पसरा गया। सेना में लेफ्टिनेंट पद के लिए चयनित हुए निशांत की पार्थिव देह रविवार को गांव पहुंची तो परिवार के लोग बेसुध हो गए। अपने होनहार बेटे को अंतिम बार देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचे। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
कासनी गांव निवासी निशांत धनखड़ सेना में अधिकारी बनने के लिए चयनित हुए थे। इसी सिलसिले में वह 10 जुलाई को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण (IMA Training) के लिए पहुंचे थे। प्रशिक्षण के दौरान 9 अगस्त को दौड़ लगाते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें उपचार के लिए दिल्ली स्थित आर्मी आरआर अस्पताल (Army RR Hospital) लाया गया। निशांत समेत तीन कैडेट्स की हालत गंभीर बताई गई थी।चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था, लेकिन शनिवार शाम निशांत जिंदगी की जंग हार गए। उनकी मौत की खबर जैसे ही परिवार और गांव के लोगों को मिली, हर कोई स्तब्ध रह गया।
रविवार को निशांत की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव कासनी लाई गई। जैसे ही पार्थिव शरीर उनके आवास पर पहुंचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां और परिवार के अन्य सदस्यों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे।निशांत को अंतिम विदाई देने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।ग्रामीणों ने बताया कि निशांत बचपन से ही अनुशासन और देशसेवा की भावना से जुड़े रहे थे। सेना में अधिकारी बनने का उनका सपना पूरा होने वाला था, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान हुए इस दुखद हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं।
निशांत के अंतिम संस्कार में सैन्य सम्मान की विशेष व्यवस्था की गई। सैन्य टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर (Military Honour) दिया और पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। बादली से विधायक कुलदीप वत्स भी निशांत को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। झज्जर प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार अंशुल ने पुष्प चक्र अर्पित किया। जिला सैनिक बोर्ड की ओर से सूबेदार राजेश ने भी निशांत को श्रद्धांजलि दी।प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने परिवार को इस कठिन समय में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
निशांत के अंतिम संस्कार में ग्रामीणों के साथ बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पूर्व सैनिक और आसपास के गांवों के लोग शामिल हुए। हर किसी ने नम आंखों से युवा कैडेट को श्रद्धांजलि दी। ग्रामीणों का कहना था कि निशांत का परिवार पीढ़ियों से देश की सेवा से जुड़ा रहा है। ऐसे परिवार के होनहार बेटे का असमय चले जाना पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है। अंतिम यात्रा के दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन रहा।
बता दें कि निशांत धनखड़ का परिवार सैन्य पृष्ठभूमि वाला है। उनके परिवार के कई सदस्य भारतीय सेना और वायुसेना में सेवाएं दे चुके हैं और वर्तमान में भी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। निशांत की बहन अंशिता धनखड़ भी फ्लाइंग ऑफिसर हैं। उनका चयन करीब दो साल पहले हुआ था। परिवार में देश सेवा की यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। निशांत के दादा राम सिंह भारतीय सेना में सेवा दे चुके थे। उनके बड़े ताऊ दिवंगत नरेंद्र एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर रहे। परिवार के अन्य सदस्यों में ताऊ के बेटे कर्नल, बहू मेजर और बेटी फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर हैं। वहीं निशांत के चाचा सतेंद्र भी वारंट ऑफिसर हैं। निशांत के पिता का करीब तीन साल पहले निधन हो गया था। वह डाक विभाग में पोस्टमैन के पद पर कार्यरत थे। पिता के निधन के बाद परिवार के लिए निशांत का सेना में अधिकारी के रूप में चयन बड़ी उपलब्धि थी.परिवार को उनसे भविष्य में काफी उम्मीदें थीं।
निशांत के लेफ्टिनेंट बनने की खबर से परिवार और गांव में खुशी का माहौल था,लेकिन प्रशिक्षण के दौरान उनकी अचानक मौत ने सभी को झकझोर दिया। निशांत ने सेना में अधिकारी बनने का सपना देखा था और इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए उन्होंने कठिन सैन्य प्रशिक्षण शुरू किया था। प्रशिक्षण पूरा कर वह बतौर लेफ्टिनेंट देश की सेवा करने वाले थे। परिवार के सैन्य इतिहास को आगे बढ़ाने की उनकी तैयारी चल रही थी,लेकिन जिंदगी ने उन्हें यह मौका नहीं दिया। कासनी गांव के लोगों ने निशांत को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह युवाओं के लिए प्रेरणा थे। उनका असमय निधन केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र की बड़ी क्षति है। सैन्य सम्मान के साथ हुई उनकी अंतिम विदाई ने गांव के लोगों को भावुक कर दिया।
