उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय के संचालन के लिए 123 पदों का ढांचा होने जा रहा तैयार,123 पदों और 4 कोर्सेज से होगी शुरूआत।
देहरादून:-27 जुलाई 2026
उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय के संचालन के लिए 123 पदों का ढांचा तैयार करने पर विचार चल रहा है. इन पदों के सृजन को मंजूरी के लिए आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही विश्वविद्यालय के लिए विभिन्न पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रस्तावित पदों में शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों के साथ ही खेल प्रशिक्षण से जुड़े कोच, असिस्टेंट कोच और अन्य तकनीकी पद भी शामिल किए जाएंगे. सरकार की कोशिश है कि विश्वविद्यालय को केवल डिग्री देने वाले संस्थान तक सीमित न रखकर इसे खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और खेल प्रतिभाओं के विकास का प्रमुख केंद्र बनाया जाए।
हल्द्वानी के गौलापार में स्थापित किए जा रहे उत्तराखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास अगस्त में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर 29 अगस्त को प्रस्तावित शिलान्यास कार्यक्रम के साथ ही विश्वविद्यालय को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज होगी। विश्वविद्यालय के स्थायी भवन और अन्य आधारभूत ढांचे का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, लेकिन इसके लिए भवन निर्माण पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। उपलब्ध मौजूदा ढांचे से ही विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है।
विश्वविद्यालय में शुरुआती चरण में खेलों से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इनमें स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा बीएससी स्पोर्ट्स जैसे पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य खेलों को केवल मैदान तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञ तैयार करना है। स्पोर्ट्स साइंस के माध्यम से खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, फिटनेस, प्रदर्शन और वैज्ञानिक तैयारी पर काम किया जाएगा। स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में खेल आयोजनों, टीमों, संस्थानों और खेल गतिविधियों के प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञ तैयार किए जा सकेंगे। वहीं स्पोर्ट्स जर्नलिज्म के जरिए खेल पत्रकारिता और खेल संचार के क्षेत्र में युवाओं को अवसर मिलेंगे। इस तरह खेल विश्वविद्यालय में खिलाड़ी तैयार करने के साथ-साथ खेलों से जुड़े अन्य क्षेत्रों के लिए भी मानव संसाधन विकसित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के लिए प्रस्तावित 123 पदों में अलग-अलग श्रेणियों के पद शामिल होंगे। इनमें शिक्षण और प्रशासनिक पदों के अलावा कोच, असिस्टेंट कोच और खेलों से जुड़े तकनीकी पद भी प्रस्तावित हैं। इन पदों की मदद से विश्वविद्यालय में अकादमिक गतिविधियों के साथ खेल प्रशिक्षण की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।सरकार की योजना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई और प्रशिक्षण को एक-दूसरे से जोड़ा जाए।खिलाड़ी खेल विज्ञान की मदद से अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को बेहतर कर सकें, वहीं विद्यार्थियों को खेलों के व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं की जानकारी मिले। इसके लिए प्रशिक्षित कोच और तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। कैबिनेट से पदों के ढांचे को मंजूरी मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रदेश मेंदीप्ति सिंह, निदेशक खेल ने बताया कि,खेल विश्वविद्यालय को लेकर तेजी से काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। अब तैयारी 123 पदों के ढांचे को कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की है।
खेल विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर शुरुआती दौर में देहरादून के रायपुर स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज को भी संभावित स्थल के तौर पर देखा गया था। गढ़वाल मंडल में विश्वविद्यालय स्थापित करने को लेकर भी मंथन हुआ, लेकिन बाद में हल्द्वानी के गौलापार को इसके लिए अंतिम रूप दिया गया.गौलापार में पहले से मौजूद बड़े खेल परिसर और खेल सुविधाओं को देखते हुए यहां विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया गया। यहां उपलब्ध खेल आधारभूत ढांचे का उपयोग विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा। इससे नए संस्थान को प्रारंभिक स्तर पर सुविधाएं विकसित करने में भी मदद मिलेगी। सरकार की दीर्घकालिक योजना इस विश्वविद्यालय को उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं के विकास के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की है. खासतौर पर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और खेल विज्ञान की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। विश्वविद्यालय के माध्यम से खेल शिक्षा, प्रशिक्षण, शोध और प्रतिभा विकास को एक ही मंच पर लाने की कोशिश की जाएगी. उत्तराखंड में खेलों के क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन कई बार बेहतर प्रशिक्षण, वैज्ञानिक सुविधाओं और उचित मार्गदर्शन के अभाव में खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते. खेल विश्वविद्यालय के जरिए इस कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। 123 पदों के ढांचे को मंजूरी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के संचालन के लिए जरूरी मानव संसाधन तैयार होगा और धीरे-धीरे इसके अकादमिक तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जा सकेगा।
