अल्मोड़ा में सड़क के इंतजार में सरस्वती देवी की गई ज़िंदगी, रास्ता बना बाधा।
सल्ट (अल्मोड़ा):-21 अगस्त 2026
उत्तराखंड के पहाड़ के दूरस्थ गांवों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी किस तरह लोगों के लिए जानलेवा परेशानी बन सकती है, इसका दर्दनाक उदाहरण सल्ट विकासखंड के सिंगरौं गांव में सामने आ रहा है ,जहां 77 वर्षीय सरस्वती देवी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में परिजनों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। उपचार के लिए काशीपुर ले जाने के बावजूद गुरुवार शाम उनकी मौत हो गई।
सरस्वती देवी पिछले करीब एक सप्ताह से अस्वस्थ थीं। मंगलवार को उनकी हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें गांव से सड़क तक ले जाने की कोशिश शुरू की। गांव को जोड़ने वाली पक्की सड़क नहीं होने के कारण करीब ढाई किलोमीटर का संकरा और दुर्गम पैदल रास्ता ही एकमात्र विकल्प था। परिजनों ने शुरुआत में उन्हें कंधों के सहारे आगे बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ता बेहद कठिन होने के कारण काफी समय लग गया। बरसात में पगडंडी घास और झाड़ियों से ढकी होने के साथ जगह-जगह खतरनाक भी हो गई है। करीब आधा रास्ता तय करने में ही कई घंटे निकल गए। आखिरकार नेपाली मजदूरों की मदद ली गई, जिन्होंने बुजुर्ग महिला को सहारा देकर सड़क तक पहुंचाया।
परिजनों के मुताबिक सरस्वती देवी को सड़क तक लाने में चार घंटे से अधिक समय लग गया। इसके बाद निजी वाहन से उन्हें काशीपुर ले जाया गया, जहां सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। कुछ घंटे उपचार के बाद उन्हें रात में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और परिजन उन्हें अपने रिश्तेदार के घर ले आए। बुधवार को उनकी हालत सामान्य बताई गई। उन्होंने दवा ली और भोजन भी किया। गुरुवार दिन में भी किसी बड़ी परेशानी के संकेत नहीं दिखे। हालांकि शाम करीब पांच बजे जब बड़ी बहू ने उन्हें चाय के लिए उठाने की कोशिश की तो वह नहीं उठीं। परिजनों ने देखा तो उनकी सांसें थम चुकी थीं।
सरस्वती देवी की मौत के बाद ग्रामीणों में सड़क सुविधा को लेकर नाराजगी है। ग्रामीण भीम सिंह बोरा और डीएस अधिकारी का कहना है कि गांव तक सड़क होती तो बीमार महिला को समय रहते अस्पताल पहुंचाना आसान होता। उनका कहना है कि सिंगरौं में डोली या चारपाई से मरीज को ले जाने लायक रास्ता तक उपलब्ध नहीं है। बरसात के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं। पगडंडी पर घास और झाड़ियां उग आने से आवाजाही मुश्किल हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार रास्ते में सांप, बिच्छू और जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है।
सिंगरौं गांव में सड़क की समस्या सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित नहीं है। रोजगार और संपर्क मार्ग के अभाव में गांव से लगातार पलायन हुआ है। सरस्वती देवी के तीनों बेटे रोजगार के लिए बाहर रहते हैं, जबकि बेटियां भी दूसरे स्थानों पर रहती हैं। गांव में घर पूरी तरह खाली न हो, इसी वजह से वह यहां रह रही थीं। परिजनों का कहना है कि गांव की बदहाल स्थिति वर्षों से ऐसी ही बनी हुई है। सड़क नहीं होने के कारण बीमारी या आपात स्थिति में परिवारों को हर बार इसी तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार सिंगरौं गांव को सड़क से जोड़ने के लिए कई बार सर्वे किया जा चुका है, लेकिन अभी तक सड़क का निर्माण धरातल पर नहीं हो पाया है। ग्राम प्रधान भावना देवी ने बताया कि गांव के लिए संपर्क मार्ग का प्रस्ताव क्षेत्रीय विधायक महेश जीना को दिया गया है। विधायक की ओर से जल्द सड़क निर्माण का आश्वासन मिलने की बात कही गई है। सरस्वती देवी के निधन की खबर मिलते ही उनके बड़े बेटे दिनेश के ओडिशा से और दो छोटे बेटे दिल्ली से गांव के लिए रवाना हुए। अचानक हुई मौत से परिवार में शोक का माहौल है। ग्रामीणों की मांग है कि सिंगरौं को जल्द सड़क से जोड़ा जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज, बुजुर्ग या गर्भवती महिला को इलाज के लिए इस तरह दुर्गम रास्ते पर घंटों न झेलना पड़े।
