उत्तरकाशी में गर्भवती अमिना और नवजात ने तोड़ा दम,क्षेत्र में पसरा मातम।

उत्तरकाशी में गर्भवती अमिना और नवजात ने तोड़ा दम,क्षेत्र में पसरा मातम।

उत्तराकाशी:-21 अगस्त 2026

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के सीमांत इलाके से एक बेहद दुखद घटना सामने आ रही है। ओसला निवासी अमिना की प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई, जबकि उनके नवजात शिशु ने भी दम तोड़ दिया। एक ही परिवार में मां और नवजात की मौत से ओसला, गंगाड़ समेत आसपास के गांवों में शोक का माहौल है।

प्रसव के बाद बिगड़ी हालत,रास्ते में गई जान ।

जानकारी के अनुसार गंगाड़ निवासी शंकर दास उर्फ बब्लू दास की पत्नी अमिना कुछ समय से अपने मायके ओसला में रह रही थीं। प्रसव के बाद उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। परिजन बेहतर उपचार की उम्मीद में उन्हें ओसला से गंगाड़ की ओर लेकर निकले, लेकिन रास्ते में उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। गंभीर स्थिति के बीच अमिना ने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि नवजात शिशु की भी ओसला में ही मृत्यु हो गई। मां और बच्चे की एक साथ मौत की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

दुर्गम रास्तों ने फिर बढ़ाई चिंता।

घटना ने सीमांत गांवों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण गंभीर मरीजों को समय रहते उपचार उपलब्ध कराना आज भी बड़ी चुनौती है। ग्रामीणों के मुताबिक यदि आपात स्थिति में परिवहन और चिकित्सा सुविधा तत्काल उपलब्ध हो जाए तो गंभीर मरीजों को उपचार के लिए जल्द पहुंचाया जा सकता है। यही वजह है कि क्षेत्र में लंबे समय से सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग उठती रही है।

ओसला-गंगाड़ सहित चार गांवों की उम्मीदें अब भी अधूरी।

सीमांत क्षेत्र के ओसला, गंगाड़ सहित आसपास के चार गांवों के लोगों के सामने सड़क संपर्क और स्वास्थ्य सेवाओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गम इलाकों में विकास का वास्तविक लाभ तभी पहुंच सकता है, जब सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, चिकित्सकीय स्टाफ और आपातकालीन परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं जमीन पर प्रभावी रूप से उपलब्ध हों। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन से सीमांत गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने तथा आपातकालीन सेवाओं को प्रभावी बनाने की मांग उठाई है।

हेली सेवा की जरूरत ने फिर खींचा ध्यान।

सीमांत और अत्यंत दुर्गम इलाकों में आपातकालीन हेली सेवा को लेकर भी ग्रामीणों की उम्मीदें जुड़ी हैं। उनका कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि सड़क मार्ग से तत्काल अस्पताल पहुंचाना संभव न हो, तो प्रभावी एयर एंबुलेंस या हेली सेवा जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। अमिना और उनके नवजात की मौत ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सीमांत गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन परिवहन व्यवस्था कितनी आसानी से और कितनी जल्दी जरूरतमंद लोगों तक पहुंच पा रही हैं।

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