हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले को लेकर सियासत गरमाई,भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ किया प्रदर्शन।

हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले को लेकर सियासत गरमाई,भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ किया प्रदर्शन।

देहरादून:-07 सितंबर 2026

उत्तराखंड में हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है।कांग्रेस के मुख्यमंत्री आवास घेराव के बाद अब भाजपा ने भी कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देहरादून के परेड ग्राउंड में जहां कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया, वहीं भाजपा ने प्रदेशभर में समरसता और सौहार्द संकल्प धरना देकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर पलटवार किया।भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस राजनीतिक फायदे के लिए समाज में विभाजन पैदा करने का काम कर रही है। भाजपा का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे से है, लेकिन कांग्रेस अपने राजनीतिक हितों के लिए इसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है।कैबिनेट मंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास रहा है कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, पार्टी समाज के बीच छल-कपट और भ्रम पैदा करने का काम करती है। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस जिन मुद्दों को लेकर अपमान की बात कर रही है, उसे पहले अपने इतिहास पर नजर डालनी चाहिए साथ ही उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को सामाजिक सम्मान और समरसता की बात करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन को देवभूमि के सामाजिक भाईचारे को क्षत-विक्षत करने वाला कार्यक्रम करार दिया।

बता दें कि,उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है। इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि कुछ हफ़्ते पुरानी है, जब हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को एक जनसभा को संबोधित किया था।

इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी ने यहां तक कहा था कि हल्द्वानी रामलीला मैदान का शुद्धिकरण किसी जातिगत द्वेष के तहत नहीं किया गया था। भाजपा का दावा है कि रैली के दौरान मंच पर कथित रूप से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले नारे और बयानबाजी हुई थी। साथ ही मैदान में फैली गंदगी की सफाई के उद्देश्य से वहां हवन-पूजन किया गया था, जिसमें खुद वाल्मीकि समाज के लोग भी शामिल थे, लेकिन राजनीतिक रूप से यह मुद्दा सुलझने के बजाय लगातार गरमाता चला गया।

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