हरिद्वार में 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले दोषी को 20 साल का कठोर कारावास,50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगा ।
हरिद्वार:-10 सितंबर 2026
नगर कोतवाली क्षेत्र में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो ने दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। पुलिस की मजबूत पैरवी के कारण मामला दर्ज होने के करीब आठ महीने के भीतर अदालत का फैसला आने से पीड़िता और उसके परिजनो को न्याय मिला है।
जानिए क्या है पूरा मामला:- दरअसल मामला 16 जनवरी 2026 का हैसात साल की नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के संबंध में पुलिस को तहरीर दी गई थी। जिसमें बताया गया कि बच्ची अकेली खेल रही थी। इसी दौरान पंडिताई का काम करने वाला आरोपी सूरज प्रकाश पोखरियाल उस पहले बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया और कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
पीड़ित बच्ची ने रोते हुए अपने परिजनों को यह बात बताई,परिजनों ने तत्काल नगर कोतवाली पुलिस को लिखित तहरीर दी।तहरीर के आधार पर नगर कोतवाली पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने उसी दिन कार्रवाई करते हुए आरोपी सूरज प्रकाश पोखरियाल पुत्र वीरेंद्र पोखरियाल निवासी घटियाली (पौड़ी) हाल निवासी भारत माता पुरम कॉलोनी, भूपतवाला (हरिद्वार) को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था। पीड़िता का सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण भी कराया गया था। नगर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा के नेतृत्व में पुलिस टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने मामले से जुड़े साक्ष्यों का विधिवत संकलन किया। विवेचक महिला उपनिरीक्षक निशा सिंह ने जांच पूरी करने के बाद 2 मार्च 2026 को आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया. इसके बाद मामले का विचारण विशेष न्यायालय पॉक्सो में हुआ।
वहीं, नगर कोतवाली में तैनात कांस्टेबल संजीव बिष्ट ने कोर्ट में भी मजबूत पैरवी की। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद सूरज प्रकाश पोखरियाल को दुष्कर्म का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 20 साल की कठोर कारावास और 50 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। आरोपी को जुर्माना अदा न करने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
प्रभारी इंस्पेक्टर, नगर कोतवाली कुंदन सिंह राणा ने बताया कि,पुलिस की मजबूत पैरवी,प्रभावी विवेचना एवं साक्ष्य संकलन ने इस मामले में त्वरित न्याय दिलाया है। तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी से लेकर आरोप पत्र दाखिल करने तक की प्रक्रिया पूरी की गई,जिस कारण 8 महीने के भीतर बच्ची और उसके परिजनों को न्याय मिल पाया है।
