चैसिंग्या खाडू की अगुवाई में नंदा बड़ी जात पातर नचैणिया पहुंची,ब्रहमकमल को देख अभिभूत हुए नंदा भक्त।

चैसिंग्या खाडू की अगुवाई में नंदा बड़ी जात पातर नचैणिया पहुंची,ब्रहमकमल को देख अभिभूत हुए नंदा भक्त।

देवाल (चमोली):-18 सितंबर 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट.

चैसिंग्या खाडू की अगुवाई में हिमालय की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा की बड़ी जात में शामिल देवडोलियों ने वेदनी कुंड में परिक्रमा की। पूजा अर्चना के बाद बड़ी जात में शामिल दशोली तथा बंड की नंदा देवी की देवडोलियां तथा छंतोलियां उच्च हिमालय में स्थित पड़ावों को रवाना हुई। इसके तहत बड़ी जात यात्रा कलुवा विनायक होते हुए रात्रि विश्राम के लिए पातर नचैणिया पहुंची। बड़ी जात में दशोली नंदा की डोली, बंड नंदा की डोली, बंड भूमियाल की छंतोली, गेदाणु देवता की छंतोली सहित दर्जनों छंतोली भी निर्जन पड़ावों में सकुशल पहुंच गई हैं।

बड़ी जात यात्रा के तहत 12 बरस बाद मां नंदा की डोली हिमालय के निर्जन पड़ावों में पहुंची तो मां नंदा और बंड भूमियाल के जयकारों से 12 बरस का सन्नाटा टूटा। शुक्रवार को मौसम भी नंदा भक्तों पर मेहरबान रहा। चटक धूप से निर्जन पड़ावों में पहुंचे भक्तों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। शनिवार को मां नंदा की बड़ी जात की डोलियां पातर नचैणिया से छेड़ी नाग, रूपकुंड ज्यूंरागली, थाला उलारी होते हुए रात्रि विश्राम के लिए शिलासमुद्र पहुंचेगी। पहली बार मां नंदा की बड़ी जात में पहुंचे जेन जी युवा मुकेश फस्र्वाण, उपेंद्र बिष्ट, सुनील झिंक्वाण वेदनी बुग्याल,पातर नचैणिया, कलुवा विनायक, भगुवावासा की सुंदरता से अभिभूत हुए।

हिमालय की अधिष्टात्री देवी मां नंदा की बड़ी जात में शामिल श्रद्धालुओं को कलुवा विनायक से भगुवावासा तक माँ नंदा का प्रिय पुष्प ब्रह्मकमल प्रचुर मात्रा में देखने को मिला।विगत दिनों रूपकुंड भगुवावासा भ्रमण कर लौटे प्रख्यात पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल नें बताया की इस बार हिमालय परिक्षेत्र में बरसों बाद इतनी बडी संख्या में ब्रहमकमल का खिलना वाकई सुखद है। बंड मंदिर समिति के सचिव रघुनाथ सिंह फस्र्वाण ने कहा कि मां नंदा की बड़ी जात यात्रा,जन्माष्टमी से लेकर नंदाष्टमी के दौरान पहाड़ में मनाये जाने वाले सैलपाती कौथिग और नंदा अष्टमी कौथिग में माँ नंदा की पूजा इसी दिव्यपुष्प से की जाती है। पंचकेदारो में भी इन्हीं देवपुष्पों से भगवान शिव की पूजा होती है और श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में भी दिया जाता है। हिमालय की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा का प्रिय पुष्प ब्रहमकमल ही है। 12 बरस में आयोजित होने वाली मां नंदा की बड़ी जात यात्रा में ब्रहमकमल ही सबसे बडा प्रसाद माना जाता है।

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