उत्तराखण्ड में पंचायतों को मिलेगी नई ताकत,मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान,क्षेत्र पंचायत निधि होगी पुनः शुरू।
मानदेय-भत्तों में वृद्धि से लेकर विकासखंड स्तरीय समितियों में भागीदारी तक,ब्लॉक प्रमुखों के लिए सीएम की चार महत्वपूर्ण घोषणाएं।
देहरादून:-02 नवंबर 2026
उत्तराखण्ड में ग्रामीण विकास को नई गति देने और क्षेत्र पंचायतों को आर्थिक एवं प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखण्ड प्रमुख संगठन सम्मेलन-2026 में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री ने ब्लॉक प्रमुखों और पंचायत प्रतिनिधियों के हित में चार महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र पंचायत निधि को पुनः प्रारंभ करने, क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय एवं भत्तों में वृद्धि के लिए कार्यवाही करने, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विकासखंड स्तरीय समिति में क्षेत्र पंचायत प्रमुख को शामिल करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों को नगरीय क्षेत्रों में सम्मिलित करने की प्रक्रिया में संबंधित ग्राम पंचायत से विचार-विमर्श करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ब्लॉक प्रमुख और पंचायत प्रतिनिधि सरकार तथा जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं और आवश्यकताओं को समझने में उनकी भूमिका बेहद अहम है.सड़क,पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों का योगदान महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की समस्याओं,सुझावों और मांगों को सरकार गंभीरता से ले रही है। संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर इनके समाधान की दिशा में सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार पंचायतों को अधिक सक्षम बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। पंचायतों के संसाधनों, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। कहा कि पंचायत भवनों से वंचित ग्राम पंचायतों में भी चरणबद्ध तरीके से भवन निर्माण कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड का लक्ष्य गांवों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाकर ही प्राप्त किया जा सकता है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन, कृषि, बागवानी, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और पलायन रोकने में पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।मुख्यमंत्री ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल के माध्यम से शासन-प्रशासन को सीधे जनता के बीच पहुंचाया गया है। हजारों लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है और अनेक समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हुआ है।
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि पंचायतों को मिलने वाली धनराशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ किया जाए। विकास कार्य निर्धारित समय पर पूरे हों तथा उनकी गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए।उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी अभियान के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ किसानों, वरिष्ठ नागरिकों, सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने और पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित कराने में सहयोग करने की अपील की। सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष ब्लॉक प्रमुख संगठन उत्तराखण्ड राजीव कण्डारी, महासचिव गणेश चन्दोला,ज्योति ग्रोवर, संरक्षक हरीश बिष्ट सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए ब्लॉक प्रमुख एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
