कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू विवाद में नैनीताल हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित।
नैनीताल:-03 नवंबर 2026
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू की गिफ्तारी पर रोक और दर्ज मुकदमे को निरस्त करने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा है। सुनवाई पर रेखा आर्या की तरफ से कहा गया कि पति गिरधारी लाल साहू द्वारा उन्हें बदमान किया जा रहा है। इनके द्वारा सभी कंपनियों से उन्हें हटा दिया गया और उनके 80 प्रतिशत शेयर भी बेच दिए हैं। उनके राजनैतिक करियर को धूमिल किया जा रहा हैं, इसलिए याचिका को खारिज किया जाए। वहीं, गिरधारी लाल साहू की तरफ से कहा गया कि यह मुकदमा निरस्त करने योग्य है। लगाए गए सभी आरोप गलत तथ्यों पर आधारित हैं। उनके द्वारा उनको कभी भी डराया धमकाया नहीं गया। सभी कंपनियों में उनके शेयर आज भी मौजूद हैं। जिन कंपनियों से उन्हें हटाया गया हैं, इनकी सहमति से हटाया गया। कोई फर्जी हस्ताक्षर नहीं बनाए गए। उनके राजनैतिक करियर बनाने में उन्होंने पूरा सहयोग किया गया।
आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में हुई। मामले के अनुसार गिरधारी लाल साहू ने याचिका दायर कर कहा है कि दर्ज मुकदमे में उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। उन्हें गलत तरिके से फंसाकर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। उनकी शादी साल 2004 हुई थी, तब से वे अपनी पत्नी के साथ हैं। दर्ज मुकदमे में उनपर आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा अपने को अविवाहित बताकर उनसे शादी की, जबकि वे शादी के वक्त शादीशुदा थे। उनके द्वारा जालसाजी रचकर उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाके उन्हें कई कंपनियों के निदेशक पद से हटा दिया गया। यही नहीं उनके द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी और जातिसूचक शब्द भी कहे गए हैं. जबकि याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि उनकी पत्नी रेखा आर्या के मंत्री बनने के बाद उनके द्वारा 210 करोड़ की अवैध सम्पति अर्जित की गयी। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच कराने को कहा है। साथ में यह भी कहा कि उनके खिलाफ यह मुकदमा नहीं बनता है। उनकी शादी को हुए 22 साल हो गए हैं।आज तक इस संबंधित में उनके साथ कोई मन मुटाव नहीं हुआ है। उनके खिलाफ गलत तथ्यों को जोड़कर मुकदमा दर्ज किया गया। याचिका में उनके द्वारा कोर्ट से प्रार्थना की है कि उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए और दर्ज मुकदमे को निरस्त किया जाए।
