गौशाला का दरवाजा तोड़ गुलदार ने गाय को बनाया निवाला,गोशाला के आंगन में ही गाय को दफनाने को मजबूर पशुपालक।

गौशाला का दरवाजा तोड़ गुलदार ने गाय को बनाया निवाला,गोशाला के आंगन में ही गाय को दफनाने को मजबूर पशुपालक।

मेहलचौरी (गैरसैंण):-06 नवंबर 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला

शीतकाल की शुरुआत होते ही पहाड़ों में एक बार फिर गुलदार का आतंक बढ़ने लगा है,पिछली बार की तरह गुलदार गौशालाओं के दरवाजे तोड गौवंश को निवाला बना रहा है। जिससे डरे हुए पशुपालकों ने वन विभाग से गुहार लगाकर ,गुलदार से निजात दिलाने की मांग की है। गुलदार के हमलों में गौवंश के मारे जाने के बीच पशुपालकों के लिए बेहद दुखद स्थिति तब देखने को मिलती है,जब वर्षों की मेहनत ओर लगाव से पाले गए गोवंश को गुलदार के हमले में खोने के बाद गौशाला के आंगन में ही दफनाना पड़ता है।

गुरुवार की रात विकासखंड गैरसैंण के खनसर क्षेत्र के तेवाखर्क गांव में गुलदार ने पूर्व ग्राम प्रधान चंद्र सिंह बिष्ट की गौशाला का दरवाजा तोड़कर अंदर बंधी एक गाय को मार डाला,वहीं दूसरी गाय को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया। शुक्रवार सुबह जब पशुपालक की पत्नी कमला देवी दूध दुहने के लिए गौशाला पहुंचीं तो वहां का खौफनाक मंजर देखकर उनके होश उड़ गए। गौशाला के भीतर गाय का खून से लथपथ अधखाया शव पडा हुआ था ,वहीं दूसरी गाय घायल अवस्था में बेसुध पड़ी थी।

गौशाला का नजारा देख परिवारजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। घटना की सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दी, मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने मृत गाय का पोस्टमार्टम कर आवश्यक कार्रवाई की साथ ही घायल गाय की भी मरहम पट्टी की। इसके बाद ग्रामीणों द्वारा मृत गाय को गौशाला के आंगन में ही दफना दिया गया।

ग्राम प्रधान हुकम सिंह बिष्ट कै.दयाल सिंह बिष्ट,पूर्व प्रमुख सुमति बिष्ट ने कहा कि पलायन के कारण पहले ही गांव खाली होते जा रहे हैं,ऐसे में जो लोग गांव में रहकर अपनी आजीविका चलाने के लिए पशुपालन कर रहे हैं,उनके मवेशियों को गुलदार गौशालाओं के भीतर घुसकर मार रहा है,जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। साथ ही अब पशुपालन को जारी रखना भी मुश्किल हो गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष दिसंबर से मार्च 2026 के बीच विकासखंड गैरसैंण के मेहलचौरी, कुनीगाड, रंगचौणा, सिलंगा, रोहिड, आगरचट्टी क्षेत्रों में गुलदार द्वारा गोवंश को मारने की करीब एक दर्जन घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें 24 से अधिक गोवंश की जान चली गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं के चलते कई पशुपालकों ने गोपालन तक छोड़ दिया है।

इस संबंध में वन विभाग के वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर नेगी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वन कर्मियों को मौके पर भेजकर गुलदार द्वारा मारे गये गोवंश के संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर पशुपालक को मुआवजा दिलाने के लिए भी विभागीय प्रक्रिया की जा रही है। साथ ही गांव में गश्त लगाकर गुलदार को आबादी से दूर भगाने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की। साथ ही पशुपालकों को गौशालाओं में मजबूत लोहे के दरवाजे लगाने की सलाह देते हुए कहा कि गुलदार घायल होने के डर से लौहे के दरवाजे तोडने का प्रयास नहीं करता है।

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