उत्तराखंड में मकान का नक्शा पास कराना अब पहले से कहीं ज्यादा होगा आसान,Ease of Doing Business को बढ़ावा देते हुए भवन नक्शा पास करवाने की प्रक्रिया को किया गया सरल।
देहरादून-08 दिसम्बर 2025
सरकार के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत आर्किटेक्ट को अधिकार देने से अब भवन का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया सरल हो गई है.उत्तराखंड सरकार ने Ease of Doing Business को बढ़ावा देते हुए भवन नक्शा पास करवाने की प्रक्रिया को बेहद सरल और तेज कर दिया है। अब कम जोखिम वाले भवनों के नक्शे आर्किटेक्ट ही स्वीकृत कर सकेंगे, जिससे आम लोगों और बिल्डरों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। आवास विभाग में 4 सितंबर 2019 के शासनादेश में संशोधन की नई व्यवस्था लागू होने से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। इस संबंध में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने पत्र जारी किया है।
कम जोखिम वाले भवनों के नक्शों की राह आसान होगी⤵️
प्रदेश में अब कम जोखिम वाले भवनों के निर्माण की राह आसान हो गई है। सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत आर्किटेक्ट को अधिकार दे दिए हैं। वह भवन का नक्शा पास कर सकेंगे। बस इसकी सूचना संबंधित दस्तावेज के साथ प्राधिकरण को देनी होगी। आवास विभाग ने चार सितंबर 2019 के शासनादेश में संशोधन कर दिया है। प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। जिसमें कहा है कि भवन मानचित्र स्वीकृति की जटिल प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने के लिए बदलाव आवश्यक थे। संशोधित व्यवस्था लागू होने से आम नागरिकों और बिल्डरों को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने होंगे। नई व्यवस्था के अनुसार, कम जोखिम वाले भवनों के लिए एससी-1 (जिसमें आर्किटेक्ट, इंजीनियर यह घोषित करता है कि नक्शा सभी नियमों के अनुसार तैयार है और निर्माण की जिम्मेदारी उसकी होगी) और एससी-2 (जिसमें स्ट्रक्चरल इंजीनियर भवन की संरचनात्मक सुरक्षा का प्रमाण देता है) फॉर्म के साथ प्रस्तुत नक्शे को मान्यता प्राप्त आर्किटेक्ट स्वीकृत कर सकेगा। आर्किटेक्ट से स्वीकृति के बाद संबंधित प्राधिकरण को सिर्फ सूचना देनी होगी।
सरकार का मानना है कि इससे नक्शा पास होने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। संशोधित नियमों के तहत, यदि आर्किटेक्ट की ओर से स्वीकृति की जानकारी भेजे जाने के बाद 15 दिनों के भीतर अधिकारी कोई आपत्ति नहीं देते तो आवेदक निर्माण कार्य शुरू कर सकता है। यह कदम प्रक्रिया को तेजी देने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इससे नक्शा पास कराने में समय की बचत होगी। आम नागरिकों व बिल्डरों की परेशानी कम होगी। दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी, निर्माण मंजूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आएगी।
क्या बदला है नियम⤵️
अब तक भवन मानचित्र स्वीकृति के लिए कई विभागों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जो समय लेने वाली और जटिल थी। नई व्यवस्था में कम जोखिम वाले भवनों के नक्शे को मान्यता प्राप्त आर्किटेक्ट ही सीधे स्वीकृत कर सकेगा। इसके लिए दो महत्वपूर्ण फॉर्म शामिल होंगे
SC-1_ आर्किटेक्ट/इंजीनियर का प्रमाण कि नक्शा सभी नियमों के अनुरूप है।
SC-2 _स्ट्रक्चरल इंजीनियर का प्रमाण कि भवन संरचनात्मक रूप से सुरक्षित है।
आर्किटेक्ट द्वारा स्वीकृति के बाद केवल संबंधित प्राधिकरण को सूचना देनी होगी।
सबसे बड़ी राहत – 15 दिन में मंजूरी सुनिश्चित
नई व्यवस्था के अनुसार⤵️
आर्किटेक्ट की ओर से सूचना भेजने के बाद, यदि 15 दिनों तक प्राधिकरण कोई आपत्ति नहीं देता, तो आवेदक निर्माण कार्य शुरू कर सकता है।
यह नियम स्वचालित मंजूरी की तरह काम करेगा, जो प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाता है।
क्या होगा फायदा⤵️
नक्शा पास कराने में लगने वाला समय काफी घटेगा।
नागरिकों और बिल्डरों को बार-बार दफ्तर नहीं जाना पड़ेगा।
भ्रष्टाचार और अनावश्यक अड़चनों में कमी आएगी।
निर्माण परियोजनाओं में गति और पारदर्शिता बढ़ेगी।
छोटे मकानों और कम जोखिम वाले भवनों के लिए बड़ी राहत।
सरकार का यह फैसला उत्तराखंड में निर्माण से जुड़े कार्यों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आर्किटेक्ट को अधिकार देने से नक्शा पास होने की प्रक्रिया तेज होगी और आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
