इंडियन रिजर्व बटालियन की तीसरी यूनिट खोलने के लिए गैरसैंण में तलाशी जाएगी जमीन।
2021 में त्रिवेंद्र रावत सरकार ने की थी बटालियन खोलने की घोषणा।
देहरादून व नैनीताल जिलों में स्थापित दो बटालियनों से ही चल रहा काम,स्थानीय जनप्रतिनिधि बोले गैरसैंण में पर्याप्त मात्रा में है जमीन।
गैरसैंण:-01 जुलाई 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.
उत्तराखंड राज्य के पुलिस विभाग की प्रस्तावित तीसरी इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) की स्थापना को लेकर साढे पांच साल बाद एक बार फिर से सरकार स्तर पर कवायद शुरू होती नजर आ रही है।
ग्रीष्मकालीन राजधानी की अहमियत को देखते हुए 4 फरवरी 2021 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राजधानी परिक्षेत्र के जनपद चमोली व अल्मोड़ा के इस सीमांत क्षेत्र में इंडियन रिजर्व बटालियन की तीसरी यूनिट खोलने की घोषणा की थी,लेकिन तब एक माह बाद ही 9 मार्च 2021 को उनके इस्तीफे के बाद से ही ये घोषणा फाइलों में ही दबी रह गयी। लगभग 65 महीनों के लंबे इंतजार कर बाद ही सही सरकार ने एक बार फिर इस घोषणा को अमल में लाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यवाही शुरू कर दी है,जिसको लेकर 27 जुलाई को जनपद चमोली पुलिस के आला अधिकारीयों ने गैरसैंण पहुंचकर गैरसैंण नगर से 8 किलोमीटर दूर पज्याणा व ढांगा गांवों के सीमावर्ती क्षेत्र का निरीक्षण किया। लेकिन तब बरसात के चलते निरीक्षण का कार्य पूरा नहीं हो पाया था।
अब अगस्त माह के पहले सप्ताह में गहन स्तर पर भूमि संबंधी निरीक्षण किये जाने की तैयारी है। जिसको लेकर विकासखंड गैरसैंण के अंतर्गत अन्य संभावित स्थानों पर भी निरीक्षण किया जाएगा। लगभग 1 हजार पदों वाले इस बटालियन की स्थापना के लिए 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसको लेकर विभाग द्वारा पूर्व में भी प्रयास किए गए थे लेकिन,स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बगैर हुए निरीक्षण की रिपोर्ट का आज तक पता नहीं चल पाया।
इंडियन रिजर्व बटालियन को लेकर केंद्र को आवश्यक अनुमति पत्र भेजे जाने और उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन की सक्रियता के चलते एक बार फिर गैरसैंण क्षेत्र में बटालियन की स्थापना को लेकर भूमि निरीक्षण कार्य विभागीय स्तर पर शुरू कर दिया गया है। भूमी निरीक्षण को लेकर पुलिस विभाग के आरआई चमोली जितेंद्र जोशी बताते हैं कि ,बटालियन की स्थापना के लिए लगभग 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है ,जिसके लिए पजियाणा गांव में सर्वे किया गया था,लेकिन बारिश के चलते सर्वे कार्य पूरा नहीं हो पाया। इसलिए अगस्त माह में फिर से निरीक्षण कार्य प्रारंभ किया जाएगा,जिसमें राजस्व विभाग के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से संभावित जगहों की तलाश कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
मामले को लेकर तहसीलदार गैरसैण हरीश पांडे ने बताया कि एसआईआर का कार्य पूरा होते ही जिले की टीम भूमि निरीक्षण को आएगी।
जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने कहा की निरीक्षण से पूर्व सभी जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी जानी चाहिए, जिससे भूमि चयन में मदद हो सके। उन्होंने कहा की गैरसैंण को जिला बनाए जाने सहित भविष्य में स्थाई राजधानी के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमी है।जमीन न होने का बहाना सिर्फ गैरसैंण को उपेक्षित किये जाने की नियत से कहा जाता रहा है ,जिसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
मामले को लेकर विधायक कर्णप्रयाग अनिल नौटियाल ने कहा की गैरसैंण का निरंतर विकास सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। आईआरबी बटालियन के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है,जिसके लिए पुलिस अधीक्षक चमोली से वार्ता कर राजस्व विभाग के साथ ही स्थानीय लोगों से भी सहयोग लिए जाने को कहा गया है।
गैरसैंण में संभावित निर्माण स्थल
उल्लेखनीय है कि विकासखंड गैरसैंण के अंतर्गत ही पजियाणा -ढांगा सहित मेहरगांव रामडा के सिलकोट चाय बागान के इर्द-गिर्द की जमीन ,सोनियाणा-खत्रियाणा के रिठिया क्षेत्र,नागचूलाखाल क्षेत्र,पंचाली, हरगढ़,धारापानी ,बंज्याणी गावों के ईर्दगिर्द की भूमि ,सिलंगा-रंगचौणा के नागार्जुनसैंण ,कुनीगाड के दुर्गादेवी सैंण खनसर क्षेत्र के झूमाखेत के नजदीक भी सैकडों हेक्टेयर भूमी उपलब्ध है, जिनको सर्वे में शामिल किया जा सकता है।
राज्य को 5 बटालियनों की आवश्यकता
राज्य में जहां 5 बटालियनों की आवश्यकता बतायी जाती रही है ,लेकिन तीसरी यूनिट की घोषणा के 5 साल बीतने के बावजूद मामला फाईलों में ही अटका है । वर्तमान में संचालित दो यूनिटों में से एक नैनीताल जनपद के बैलपडाव -रामनगर में तो दूसरी सुद्दोवाला देहरादून में है।
