कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित,सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आज से लागू।
रामनगर (नैनीताल)-05 फरवरी 2026
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा और प्राकृतिक वातावरण को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त रखने के उद्देश्य से एक बड़ा और सख्त फैसला लागू किया गया है,सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के अनुपालन में अब कॉर्बेट के सभी पर्यटन जोनों में जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों के लिए मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है, यह नई व्यवस्था आज से प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जंगल सफारी के दौरान स्मार्टफोन का किसी भी प्रकार से उपयोग नहीं किया जाएगा,इसके पीछे मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा व पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, जंगल क्षेत्र में शोर और डिजिटल हस्तक्षेप को कम करना तथा प्राकृतिक वातावरण को यथासंभव स्वाभाविक बनाए रखना है,आदेश के तहत अब सभी पर्यटकों को सफारी से पहले प्रवेश द्वार पर ही अपने मोबाइल फोन जमा कराने होंगे,नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित पर्यटक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि,पर्यटकों को पेशेवर कैमरे जैसे डीएसएलआर या अन्य स्टिल कैमरे ले जाने की अनुमति दी गई है, ताकि वे वन्यजीवों और प्राकृतिक दृश्यों की फोटोग्राफी कर सकें,लेकिन मोबाइल फोन से फोटो या वीडियो बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन अमित ग्वासाकोटी ने जानकारी देते हुए बताया कि डे-सफारी पर जाने वाले सभी पर्यटकों को गेट पर ही अपने मोबाइल फोन जमा कराने होंगे,वहीं नाइट स्टे पर जाने वाले पर्यटकों के मोबाइल फोन जिप्सी में लगे विशेष बॉक्स में रखे जाएंगे, जो जिप्सी चालक और नेचर गाइड की निगरानी में रहेगा,उन्होंने बताया कि नाइट स्टे वाले पर्यटकों को विश्राम गृह पहुंचने के बाद मोबाइल फोन वापस कर दिए जाएंगे, लेकिन उनका उपयोग केवल आवास के भीतर ही किया जा सकेगा,यदि कोई पर्यटक आवास के बाहर मोबाइल फोन का उपयोग करता पाया गया तो उसका मोबाइल फोन सीज किया जाएगा। साथ ही संबंधित नेचर गाइड और जिप्सी चालक के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी,इस आदेश के तहत न केवल पर्यटकों, बल्कि नेचर गाइड और जिप्सी चालकों को भी सफारी के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। कॉर्बेट प्रशासन ने सभी पर्यटकों से अपील की है कि वे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पार्क नियमों का पालन करें, ताकि वन्यजीव संरक्षण के इस प्रयास को सफल बनाया जा सके।
