चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ जी के कपाट 18 मई को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर ग्रीष्मकाल के लिए खोले जाएंगे।
गोपेश्वर (चमोली)-23 जनवरी 2026
चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ जी के कपाट 18 मई को विधि विधान वैदिक परंपरा के साथ आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। बसंत पंचमी पर गोपीनाथ मंदिर में पारंपरिक पूजा के साथ भगवान रुद्रनाथ जी के कपाट खुलने की तिथि घोषित की गई। पंच केदारों में चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ जी के कपाट 18 मई को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर ग्रीष्मकाल के लिए खोले जाएंगे। आज बसंत पंचमी के पावन पर्व पर भगवान रुद्रनाथ जी के शीतकालीन गद्दी स्थल गोपीनाथ मंदिर में ब्राह्मणों ने हक हकूकधारियों की मौजूदगी में पंचांग गणना के आधार पर तिथि की घोषणा की।
शीतकालीन पूजा स्थल गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में भगवान रुद्रनाथ के कपाट खुलने की घोषणा आज प्रातः काल में पंचांग गणना के साथ हो गई है. बताते चलें कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित पंचम केदार में से एक चतुर्थ केदार में भगवान शिव के मुख रूप की पूजा होती है और यहां भगवान अपने एकानन स्वरूप में विराजमान रहते हैं. इसलिए भगवान शिव को यहां एकानन भोलेनाथ के नाम से भी पुकारा जाता है.लगभग 18 किलोमीटर की कठिन दूरी को तयकर भक्त रुद्रनाथ पहुंचते हैं. रुद्रनाथ पहुंचने के लिए गोपेश्वर के मंडल सगर गांव व जोतिर्मठ के उर्गम,डुमुक होते हुए भी पैदल मार्ग से भगवान रुद्रनाथ के धाम पहुंचा जा सकता है। कपाट खुलने से पूर्व 15 व 16 मई तक भगवान रुद्रनाथ के उत्सव विग्रह स्वरूप के दर्शन गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर परिसर में भक्त कर पाएंगे. 17 मई को भगवान रुद्रनाथ जी की डोली रुद्रनाथ के लिए प्रस्थान करेगी और 18 मई को पूर्ण विधि विधान के साथ दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर भगवान रुद्रनाथ जी के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिये जाएंगे। कपाट खुलने की तिथि की घोषणा रुद्रनाथ मंदिर के शीतकालीन प्रवास स्थल गोपीनाथ मंदिर में वसंत पंचमी पर्व पर आयोजित पंचांग पूजा के बाद की गई। शुक्रवार को गोपीनाथ मंदिर में पंचांग पूजा संपन्न होने के पश्चात पंडित दिनेश थपलियाल ने पंचांग के आधार पर कपाट खुलने की तिथि एवं उससे पूर्व होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंचांग के अनुसार 15 मई और 16 मई को भगवान रुद्रनाथ की विग्रह डोली गोपीनाथ मंदिर से बाहर लाई जाएगी, जहां यह भक्तों के दर्शनार्थ मंदिर परिसर में विराजमान रहेगी। इसके पश्चात 18 मई को परंपरागत
रीति-रिवाजों के साथ भगवान रुद्रनाथ की डोली बुग्यालों में स्थित रुद्रनाथ मंदिर के लिए रवाना होगी। यात्रा पूर्ण होने के बाद 18 मई को दोपहर 12:57 मिनट पर विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे।इस वर्ष रुद्रनाथ मंदिर में भगवान की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी पुजारी सुनील तिवारी निभाएंगे, जो पांच अर्चनाओं के माध्यम से पूजा संपन्न कराएंगे।
पौराणिक परंपराओं के अनुसार शीतकाल के दौरान 6 माह के लिए भगवान रुद्रनाथ के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए जाते हैं और उसके बाद भगवान की उत्सव डोली उनकी शीतकालीन गद्दी स्थल गोपीनाथ मंदिर में विराजमान रहती है 6 माह तक भगवान रुद्रनाथ की नित्य पूजा अर्चना गोपीनाथ मंदिर में होती है जो श्रद्धालु रुद्रनाथ तक नहीं पहुंच पाते हैं वह भगवान रुद्रनाथ के दर्शन गोपीनाथ मंदिर में करते हैं.रुद्रनाथ मंदिर पूरे उत्तर भारत में एकमात्र ऐसा शिव मंदिर है जहां पर भगवान शिव के मुख दर्शन होते हैं, यह मंदिर उत्तराखंड के पांच केदारों में से चतुर्थ केदार के रूप में प्रसिद्ध है।
