चारागाह भूमि की नीलामी के विरोध में ग्रामीणों ने दिया धरना,जल-जंगल-जमीन बचाने को जुटे 22 गांवों के लोग।

चारागाह भूमि की नीलामी के विरोध में ग्रामीणों ने दिया धरना,जल-जंगल-जमीन बचाने को जुटे 22 गांवों के लोग।

टिहरी गढ़वाल:- 22 जून 2026

उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन को बचाने तथा थौलधार ब्लॉक के राम गांव और बोर गांव की चारागाह भूमि की प्रस्तावित नीलामी को निरस्त करने की मांग को लेकर सोमवार को नई टिहरी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया। आंदोलन में 22 गांवों के जनप्रतिनिधि, ग्रामीण, पशुपालक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों गांवों की करीब 79 नाली पंचायती गौचर भूमि की नीलामी की तैयारी की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों के अधिकारों और पशुपालन से जुड़े हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि गौचर भूमि गांव की साझा संपत्ति है और इसका उपयोग वर्षों से ग्रामीणों एवं पशुपालकों द्वारा किया जाता रहा है। ऐसे में इसकी नीलामी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

धरनास्थल पर वक्ताओं ने कहा कि बोर गांव और राम गांव की लगभग 1.572 हेक्टेयर चारागाह भूमि स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों की जीवनरेखा है। यह भूमि वर्षों से मवेशियों के चरान, ग्रामीणों की आजीविका और पारंपरिक संसाधनों के संरक्षण का आधार रही है। ऐसे में इसकी नीलामी किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं की जाएगी।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन स्थानीय जनता की भावनाओं और हितों की अनदेखी कर चारागाह भूमि को नीलाम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में चारागाह भूमि का महत्व मैदानी क्षेत्रों से कहीं अधिक है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन पर निर्भर हैं। यदि यह भूमि ग्रामीणों के हाथों से निकल गई तो इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और पारंपरिक जीवनशैली पर पड़ेगा।

धरने में शामिल जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल दो गांवों की भूमि बचाने का नहीं बल्कि उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल निविदा प्रक्रिया निरस्त करने और चारागाह भूमि को संरक्षित रखने की मांग की।

गौरतलब है कि इससे पूर्व सुल्याधार में आयोजित महापंचायत में 22 गांवों के लोगों ने एकजुट होकर चारागाह भूमि बचाव आंदोलन संघर्ष समिति का गठन किया था। समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधान नत्थी सिंह कैंतुरा ने कहा कि जब तक नीलामी प्रक्रिया वापस नहीं ली जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

धरना-प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चारागाह भूमि बचाने और जनभावनाओं का सम्मान करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से गौचर भूमि की नीलामी संबंधी सभी प्रक्रियाओं को तत्काल निरस्त करने और ग्रामीणों के हितों की रक्षा करने की मांग की।वहीं प्रताप नगर के विधायक विक्रम सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है।

प्रदर्शन में प्रतापनगर विधायक विक्रम सिंह नेगी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुरारी लाल खड़वाल, कांग्रेस शहर अध्यक्ष कुलदीप पंवार, मूर्ति सिंह नेगी, भाजपा नेता अतर सिंह तोमर, डॉ. प्रमोद उनियाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मान सिंह रौतेला, यूकेडी जिलाध्यक्ष डी.डी. पंत, लुशुन टोडरिया समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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