गैरसैंण से गुजरने वाले राजमार्ग की दशा सुधारने को पैरोकार की जरूरत।
राजमार्ग बनने के 22 सालों बाद भी नहीं हुआ मानकों के अनुसार विकास।
चौड़ीकरण की घोषणा के 5 सालों बाद समरेखण स्वीकृत,लेकिन तैयार नहीं हो पायी डीपीआर।
चमोली ,अल्मोडा व नैनीताल जनपदों से गुजरती है 235 किलोमीटर लंबी सडक।
उत्तराखंड के मध्य भाग से गुजरने वाली सामरिक,धार्मिक,पर्यटन व व्यापारिक महत्व की सडक।
गैरसैंण:-13 सितंबर 2026
रिपोर्ट-प्रेम संगेला.
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण से होकर गुज़रने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग की खस्ताहालत लंबे समय से चर्चाओं में बनी हुई है। केन्द्र सरकार स्तर पर उचित पैरवी के अभाव में सडक लंबे समय से तकनीकी अड़चनों के मकड़जाल से बाहर नहीं निकल पा रही है।
5 साल पूर्व सडक को दो लेन किए जाने की घोषणा के बाद सडक का समरेखण कार्य तो स्वीकृत हो चुका है, लेकिन विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार न होने से मामला फाईलों में ही अटका हुआ है। महत्वपूर्ण मार्ग होने के बाबजूद अब तक एक लेन सड़क होने का खामियाजा राजमार्ग किनारे बसे बाजारों ओर इस पर सफर करने वाले यात्रियों को भुगतना पड रहा है। सडक पर बेहिसाब गढ्ढे जहां दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे हैं,वहीं आए दिन का जाम परेशानियों का सबब बना हुआ है,जिससे ग्रीष्मकालीन राजधानी परिक्षेत्र के मेहलचौरी,गैरसैंण,आदिबद्री ओर सिमली बाजार समस्या से जूझ रहे हैं।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के मध्य भू भाग से गुजरने वाली 235 किलोमीटर की लंबाई लिए राजमार्ग संख्या 109 (पूर्व मे 87 ) कुमाऊं क्षेत्र के नैनीताल जनपद के ज्योलिकोट से शुरू होकर चमोली जनपद के कर्णप्रयाग में ॠषिकेश-बद्रीनाथ राजमार्ग 7 से मिलान करता है। जो की दोनों मंडलों के सामरिक महत्व के शहरों,अंतराष्ट्रीय सीमाओं,धार्मिक -पर्यटन व व्यापारिक क्षेत्रों को जोड़ने का काम करती है।यह मार्ग नैनीताल जनपद के नजदीकी,भवाली,कैंची-धाम,अल्मोडा,मजखाली,रानीखेत,द्वाराहाट,चौखुटिया होते हुए पांडुवाखाल से चमोली की सीमा में प्रवेश करती है।
65 सालों से उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर :-उल्लेखनीय है कि भारत-चाइना युद्ध के दौरान छठे दशक में बनी यह सड़क 65 सालों के लंबे अंतराल बाद भी उपेक्षा झेलने वाली सड़कों में शामिल है। सड़क के महत्व को देखते हुए वर्ष 2004 में तत्कालीन केंद्रीय परिवहन मंत्री भुवनचंद खंडूरी द्वारा इसे बाजपेयी सरकार के कार्यकाल के अंतिम महीनों में राजमार्ग घोषित किया गया, लेकिन 22 वर्षों बाद भी यह सड़क राजमार्ग सड़कों की मानक गुणवत्ता की सुविधाओं से आज भी वंचित है।
डीपीआर बनाने वाली कंपनी का अनुबंध क्यों हुआ निरस्त:- इस मार्ग के महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में इसे राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर आलवेदर डिजाईन में दो-लेन बनाने की घोषणा की, जिसको लेकर एक परामर्शदाता (कसंलटेंसी) कंपनी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी। जिसके तहत चौडीकरण की जद में आने वाली भूमि का अधिग्रहण,मुआवजा व वन भूमि के मामलों को लेकर औपचारिकताएं पूरी करनी थी,लेकिन तय तीन साल की अवधि में डीपीआर तैयार न होने पर इसी साल मार्च माह में अनुबंध समाप्त कर दिया गया है। नयी कंपनी के चयन के लिए अगस्त माह में निविदा आमंत्रित की गयी है। जिसके लिए इस साल के आखिर तक चयन की संभावना है। जिसके बाद नयी कंपनी पुराने डीपीआर को भी आगे बढ़ाएगी,तो इसमें भी साल दो साल का समय लगने की संभावना है।
समरेखण में स्वीकृत कार्य:- अब तक तैयार समरेखण के हिसाब से आलवेदर सड़क की तर्ज पर चौड़ीकरण होने के साथ ही मार्ग पर पुराने पुलों की जगह नए पुल,बायपास मार्ग, सुरंग मार्ग निर्माण शामिल हैं। यातायात को सुगम ओर सरल बनाने के साथ ही समय बचाने के लिए जनपद अल्मोड़ा के रानीखेत के नजदीकी गगास व चौखुटिया जबकि चमोली के मेहलचौरी के पुल डबल लेन के बनाए जाने हैं। साथ ही चमोली के गैरसैंण,आदिबद्री ओर कर्णप्रयाग बाजारों में बायपास सड़कें बनाए जाने के प्रस्ताव शामिल हैं। जिसके तहत कर्णप्रयाग में दो पुल व एक टनल का निर्माण कर एन एच 7 बद्रीनाथ मार्ग पर मिलाया जाना प्रस्तावित है। वहीं,अल्मोडा के अंतर्गत चौखुटिया व द्वाराहाट बाजार भी बायपास होंगे।वहीं, मेहलचौरी से निकटवर्ती सिमलखेत व कालीमाटी गैरसैण के समीप से खेती के बीच दो टनलों के निर्माण की संभावनाओं को लेकर प्रस्ताव प्राधिकरण को भेजे गये हैं, जो अभी अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं हैं। जबकि द्वाराहाट व गगास टनलों के निर्माण के लिए भी प्रस्ताव सुझाव के रूप में भेजे जा रहे हैं।
26 सालों में अब तक हुए कार्य:- उल्लेखनीय है की 2004 में राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित होने के बाद चमोली ,अल्मोडा ओर नैनीताल जिलों से गुजरने वाले इस 235 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 2016 से शुरू हुए चौड़ीकरण के कार्यों के तहत नैनीताल जिले के हल्द्वानी डिविजन के अंतर्गत ज्योलिकोट से खैरना तक 35 किलोमीटर का डेढ लेन कार्य,रानीखेत डिवीजन के अंतर्गत खैरना से पाण्डुवाखाल 136 किलोमीटर में खैरना से क्वारब तक 20 किलोमीटर डबल लेन तो आगे कहीं डेढ लेन ओर सिंगल लेन सड़क है। जबकि रूद्रप्रयाग डिविजन के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन राजधानी परिक्षेत्र गैरसैंण के अंतर्गत पांडुवाखाल से कर्णप्रयाग तक 64 किलोमीटर सड़क में से महज 10 किलोमीटर की सड़क ही सिमली से चांदपुरगढी तक डेढ लेन बनी है।
वर्तमान में डामरीकरण,मेहलचौरी पुल की मरम्मत ओर सुरक्षा संबंधी कार्य प्रस्तावित:–फिलहाल बरसात के सीजन में सडक की खराब स्थिति को लेकर राजमार्ग विभाग पूर्व में स्वीकृत कुछ हिस्से में डामरीकरण की तैयारी में है,जिसके तहत पूर्व में स्वीकृत 18 किलोमीटर के डामरीकरण में से 7 किलोमीटर का डामरीकरण दिवालीखाल से गैरसैंण की तरफ व 2 किलोमीटर कर्णप्रयाग के नजदीक पूर्व में किया जा चुका है, शेष 9 किलोमीटर का डामरीकरण भी दिवालीखाल से गैरसैंण धुनारघाट के बीच बरसात के बाद किया जाएगा। वही, पांडुवाखाल से कर्णप्रयाग के बीच में छूटे रहे शेष 45 किलोमीटर डामरीकरण के लिए के लिए 67 करोड़ का आगणन स्वीकृति के लिए भेजा गया है। किलोमीटर 174 पर मेहलचौरी रामगंगा पुल का डामर ओर लोहे की पलेंटे उखडने से जोखिम बना हुआ है। जिसको लेकर कुछ माह पूर्व 44 मीटर लंबे पुल की भार वहन क्षमता का परीक्षण किया गया था जिसके मानकों में सही पाए जाने के बाद अब लगभग 18.69 लाख की स्वीकृत लागत से सुधारीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा। जबकि कर्णप्रयाग के अपर बाजार ओर नजदीकी जखेड सहित आदिबद्री के ताल में धंस रही सडक की सुरक्षा को लेकर 155 करोड का इस्टीमेट भी शासन को भेजा गया है।
सडक निर्माण के क्या हैं मानक:- एक लेन सड़क पर डामरीकरण 3.75 मीटर के साथ कुल चौडाई 7 मीटर ,डेढ लेन 5.5 मीटर डामरीकरण कर साथ 10 मीटर व डबल लेन 7 मीटर डामरीकरण के साथ 14 मीटर होती है । डेढ व डबल लेन निर्माण में बाजारों की स्थिति के अनुसार समायोजित किया जाता है।
क्या कहते हैं विभागीय अधिकारी:- अधीक्षण अभियंता रानीखेत डिविजन अशोक चौधरी ने बताया की राष्ट्रीय राजमार्ग 109 के चौड़ीकरण को लेकर सड़क के डिजाइन सहित बायपास ओर संभावित टनलों के निर्माण का आगणन तो स्वीकृत हो चुका है,लेकिन डीपीआर बनाने वाली कंपनी द्वारा तय समय में काम पूरा न करने से अनुबंध समाप्त कर दिया गया है। नई कंपनी के चयन की प्रक्रिया इस साल के आखिर तक पूरी हो जाएगी,जिसके बाद भूमि अधिग्रहण मुआवजा व वन भूमि से संबधित मामलों की डीपीआर तैयार कर समरेखण के साथ जोडकर अंतिम आगणन तैयार होगा,जिसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंप दिया जाएगा।
अधीक्षण अभियंता रूद्रप्रयाग डिविजन ओमकार पांडे ने बताया की सड़क पर पड़े गढ़ों से यातायाता में हो रही असुविधा को देखते हुए बरसात बंद होते ही डामरीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं,मेहलचौरी पुल का सुधारीकरण भी शुरू किया जाएगा। कर्णप्रयाग व चांदपुरगढी के पास धंस रही सड़क सुरक्षा के लिए आगणन शासन को भेज दिया गया है।
