नगरासू गुरुद्वारा प्रकरण- 36 घंटे के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद माने 2 निहंग सिख,गुरुद्वारे की छत से उतरे,5 अभी भी डटे।
रुद्रप्रयाग:-22 जून 2026
जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में 20 जून की शाम 7 निहंगों के घुसने के बाद से चला आ रहा घटनाक्रम अब सुलझने की ओर बढ़ रहा है। करीब 36 घंटे तक चले हाई-वोल्टेज घटनाक्रम के बाद गुरुद्वारे की छत पर डटे 2 निहंग सिख सोमवार सुबह नीचे उतर आए. हालांकि अभी 5 निहंग गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि आज मामला पूरी तरह सुलझ जाएगा। इंटरनेट भी अब शुरू हो गया है. डीएम और एसपी ने इसे आपसी विवाद बताया है और अफवाहों से बचने की अपील की है।
वहीं, दूसरी ओर रुद्रप्रयाग प्रशासन स्थिति को काबू में और शांत बता रहा है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि आखिर ऐसी स्थिति उत्पन्न कैसे हुई? यदि यह कोई अचानक लिया गया निर्णय था, तो मामला इतने लंबे समय तक क्यों चल रहा है? और यदि इसकी कोई पूर्व तैयारी थी, तो संबंधित एजेंसियों और स्थानीय सूचना तंत्र को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिल सकी? ये ऐसे सवाल हैं जिनके उत्तर भविष्य की सुरक्षा रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब उत्तराखंड में चारधाम यात्रा और श्री हेमकुंड साहिब यात्रा अपने चरम पर हैं। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में उत्पन्न हुआ तनाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति समय रहते नियंत्रित नहीं होती है तो इसका असर प्रदेश के सामाजिक और धार्मिक सद्भावना पर भी पड़ सकता है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर लगातार मौके पर डटे हुए हैं। दूसरे दिन सुबह से ही दोनों वरिष्ठ अधिकारी गुरुद्वारा परिसर में मौजूद रहे और पूरी स्थिति पर सीधी निगरानी बनाए रखी। जानकारी के अनुसार जिलाधिकारी और एसपी गुरुद्वारे की छत पर मौजूद निहंग सिखों से फोन और माइक के माध्यम से लगातार संवाद स्थापित कर रहे हैं। अधिकारियों ने उन्हें संयम बरतने,कानून का सम्मान करने और शांतिपूर्ण समाधान स्वीकार करने के लिए समझाया। कई घंटों तक चली वार्ता के बाद आखिरकार थोड़ा बहुत सकारात्मक परिणाम सामने आया,फिलहाल 2 निहंग शांतिपूर्वक नीचे उतर गए। अभी 5 निहंग हालांकि गुरुद्वार की सबसे ऊपरी मंजिल पर डटे हुए हैं।
