मां नंदा की बड़ी जात यात्रा को निर्जन पड़ाव बने चुनौती।

मां नंदा की बड़ी जात यात्रा को निर्जन पड़ाव बने चुनौती

चमोली:-13 सितंबर 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट.

मां नंदा की बड़ी जात यात्रा के लिए उच्च हिमालय में स्थित निर्जन पड़ाव चुनौती होंगे। इसके चलते बड़ी जात यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को संभलकर यात्रा करनी होगी।
दरअसल नंदा की बड़ी जात में दशोली तथा बंड की नंदा की उत्सव डोलियांें के साथ ही तमाम गांवों की छंतोलियां और पश्वाओं के दल यात्रा में चल रहे हैं। इसके चलते वाण से आगे के उच्च हिमालय में स्थित निर्जन पड़ावों में व्यवस्था बनाने और सुरक्षित आवाजाही चुनौती बनी हुई है। इस साल बड़ी जात यात्रा के आयोजन के चलते अभी तक उच्च हिमालयी क्षेत्रों के पैदल रास्ते व्यवस्थित नहीं हो पाए हैं। इसके चलते इन इलाकों में आवाजाही करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

वाण से गैरोलीपातल,बेदनी बुग्याल,पातरनचैणियां, रूपकुंड, ज्यूंरागली, शिलासमुद्र, होते हुए बड़ी जात होमकुंड तक जाएगी। हालाकि वाण से बेदनी कुंड तक की आवाजाही को सुरक्षित बताया जा रहा है। इसके बावजूद बेदनी बुग्याल से होमकुंड तक की यात्रा कठिन तो है ही अपितु चुनौतीपूर्ण भी। वाण से गैरोलीपातल 10 किमी की दूरी पर स्थित है। गैरोलीपातल से बेदनी बुग्याल की पैदल दूरी 3 किमी ही है। बेदनी से पातरनचैणियां , की दूरी 6 किमी तथा पातरनचैणियां से रूपकुंड 7 किमी की दूरी पर स्थित है। रूपकुंड से शिलासमुद्र की दूरी 15 किमी है। शिलासमुद्र से होमकुंड की दूरी वैसे 16 किमी ही है। इस बार ग्लेशियर से पट जाने के कारण श्रद्धालुओं को अप एंड डाउन के चलते करीब 30 किमी की पैदल दूरी पार कर होमकुंड पहुंचना होगा। होमकुंड तक पहुंचना इस बार पहले की तरह आसान भी नहीं है। 1988, 2000 तथा 2014 की जात में उच्च हिमालय के निर्जन पड़ावों तक पहुंचने के लिए पैदल मार्गो को व्यवस्थित कर दिया जाता था। इस बार पैदल रास्तों को व्यवस्थित नहीं किया जा सका है।

शिलासमुद्र से होमकुंड तक की आवाजाही की राह आसान नहीं।

दरअसल सरकार नंदा राजजात यात्रा के 2027 में निश्चित होने के चलते अभी आबादी वाले पड़ावों में ही आधारभूत सुविधाओं के विकास पर ही फोकस किए हुए है। निर्जन पड़ावों में तो पैदल रास्तों तथा डेंजर जोन वाले इलाकों में सुरक्षित यात्रा के लिए अभी कोई कदम ही नहीं उठाये गए हैं। नंदा की बड़ी जात का आयोजन होने के चलते अब निर्जन पड़ावों पर व्यवस्था बनाना किसी चुनौती से कम नहीं है। खासकर शिलासमुद्र से होमकुंड तक की आवाजाही को सुरक्षित व निरापद होने की चुनौती बनी हुई है। ग्लेशियर खिसकने के कारण यात्रियों को इस बार दुगनी दूरी तक करने पड़ेगी। वैसे जिला प्रशासन की टीम ने होमकुंड तक की आवाजाही का जायजा लिया तो टीम ने भी रास्तों को सुरक्षित आवाजाही के लिए आसान नहीं बताया। सवाल आस्था का होने के चलते अब बड़ी जात यात्रा के आयोजक बड़ी जात की नियत 12 साल की अवधि पर ही यात्रा निकालने पर आमादा हैं। पर्यटन विभाग ने यात्रियों की सीमित आवाजाही के लिए एड़वाइजरी जारी कर दी है।वाण में चूकिं बड़ी जात तथा लोकजात यात्रा का मिलन होने जा रहा है तो पुलिस तथा प्रशासन ने शांति पूर्ण यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को चैकस करना शुरू कर लिया है। इसके अलावा एसडीआरएफ तथा अन्य टीमों को होमकुंड तक की यात्रा के लिए अलर्ट मोड़ पर ला दिया है। इसके चलते पुलिस प्रशासन ने वाण से लेकर बेदनी बुग्याल तक की यात्रा को शांति पूर्ण ढ़ग से संचालित करने को लेकर कमर कस ली है। बेदनी से होमकुंड और वापसी के लिए पुलिस बल के साथ ही एसडीआरएफ तथा अन्य टीमें भी बड़ी जात यात्रा के साथ चलेंगी। बधाण की नंदा की उत्सव डोली बेदनी बुग्याल से वापस लौट आएगी। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा की चुनौतियां बनी हुई हैं।

बड़ी जात में श्रद्धालुओं की संख्या रहे सीमित।

चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि होमकुंड तक चलने वाली नंदा की बड़ी जात यात्रा को लेकर आयोजकों को सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को ले जाने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की एडवांस टीम ने भी लौट कर बताया कि आवाजाही के लिए पैदल रास्ते न तो सुरक्षित है और ना ही व्यवस्थित। कहा कि आयोजकों को इस दिशा में सतर्क होकर सुरक्षित और निरापद यात्रा के लिए कदम बढ़ाने होंगे। इस बारे में लगातार प्रशासन की ओर से अपील की जा रही है। उनका कहना था कि उच्च हिमालय में होने जा रही इस यात्रा को लेकर सभी को अपनी सुरक्षित यात्रा का ख्याल रखना होगा।

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