स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर देहरादून से चली पदयात्रा पहुंची गैरसैंण,कांग्रेस,यूकेडी व उपपा ने किया जोरदार स्वागत।

स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर देहरादून से चली पदयात्रा पहुंची गैरसैंण,कांग्रेस,यूकेडी व उपपा ने किया जोरदार स्वागत।

गैरसैंण:-01 सितम्बर 2026
रिपोर्ट-पुष्कर सिंह रावत।

गैरसैण को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी बनाये जाने की मांग को लेकर स्थाई राजधानी गैरसैंण समिति के संयोजक पूर्व सचिव (आईएएस) उत्तराखंड विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में 15 अगस्त को देहरादून से शुरू हुई पैदल पदयात्रा आज सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण पहुंची. इस दौरान कांग्रेस,यूकेडी,उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के कार्यकर्ताओं व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पदयात्रियों का गैरसैंण के रामलीला मैदान पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया.गैरसैंण के रामलीला मैदान में एकत्रित होकर स्थाई राजधानी गैरसैंण की आवाज को बुलंद करते हुए स्थाई राजधानी गैरसैंण समिति के पदाधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की पुरजोर मांग की।

पदयात्रा के नेतृत्व कर रहे विनोद प्रसाद रतूड़ी ने आम जनमानस, युवाओं और मातृशक्ति से अपील करते हुए कहा कि गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाने के इस हक की लड़ाई में एकजुट होकर उनका साथ दें.कहा कि,उत्तराखंड राज्य बने 26 साल हो गए हैं,लेकिन प्रदेश वाशियों को अब तक पता नहीं है कि हमारी राजधानी कहां है.कहा कि हमारे साथ के जो राज्य झारखंड व छत्तीसगढ़ बने थे उनको अपनी स्थाई राजधानी मिल चुकी है,लेकिन उत्तराखंड एक ऐसा राज्य बन कर रह गया है जिसकी राजधनी का इन 26 सालों में भी पता नहीं लग पाया है.राज्य व केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए विनोद रतूड़ी ने कहा कि,उत्तराखंड को लेकर दोनों ही सरकारें संजीदा नही है. कहा कि,ये चाहे कितने इंजन लगा लें इनके सारे इंजन फेल हैं। पहाड़ का विकास तभी होगा जब राजधानी गैरसैंण बनेगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसे 42 शहादतों के बाद अलग राज्य मिला. बाबा मोहन उत्तराखंडी की शहादत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 38 दिन की भूख हड़ताल करने के बाद भी उत्तराखंड को उसकी राजधानी नही मिल पाई. कौशिक समिति की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार ने जनमत करवाया था और 60 प्रतिशत लोगों ने गैरसैंण को राजधानी के लिए उपयुक्त बताया था. लेकिन,तत्कालीन केंद्र सरकार ने उस रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया, जिसका नतीजा आज उत्तराखण्ड को अपनी स्थायी राजधानी नही मिल पाई है।

कहा कि आज राज्य 94 हजार करोड़ के कर्जे में डूबा हुआ है,और सरकार राजधानी तय नही कर पा रही है. कहा कि हाइकोर्ट के जजों ने भी भराड़ीसैण में 8 हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाउजूद राजधानी तय नही कर पाने को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं जो सरकार के लिए शर्म की बात है।

विनोद रतूड़ी ने कहा कि, दिल्ली में प्रवासी संगठन द्वारा 2 अक्टूबर से स्थायी राजधानी गैरसैण की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना व प्रदर्शन किया जाएगा,वहीं बताया कि 9 नवंबर राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर उच्च न्यायालय नैनीताल मैं एक याचिका दायर की जाएगी। विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि हमारी एक ही मांग है गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाय, कहा कि यदि सरकार राजधानी गैरसैंण के मुद्दे पर निर्णायक फैंसला नही लेती है तो आगे भी लड़ाई जारी रहेगी।

नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी ने कहा कि,गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग करने वाले हर संगठन का हम गैरसैंण में स्वागत करते हैं। हम चाहते हैं कि गैरसैंण में जो ग्रीष्मकालीन राजधानी बनी है उसमें मिनी सचिवालय के रूप में अब सरकार चलाना शुरु कर दे। कहा कि,गैरसैंण के नाम पर लगातार विधानसभा परिसर के अंदर बन रहे भवनों के जो करोड़ों के टेंडर हैं इस पर सरकार का ध्यान है, जबकि सरकार यहां पर जमीनी स्तर पर कार्य नहीं कर रही है। आज सड़कों,स्वास्थ्य के बदहाल हालत हैं और जितने भी भवन गैरसैंण में बने हैं और बनकर तैयार हो चुके हैं लेकिन उनका उद्घाटन करने कोई मंत्री ना आने कारण उनमें कार्य नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि,गैरसैंण केवल भवन बनाने के लिए राजधानी ना बने इसमें जमीनी रूप में सरकार कम करें यहां पर विभिन्न विभागों के अधिकारों की नियुक्त की जाए।

उत्तराखंड क्रांति दल के कमल किशोर डिमरी ने कहा कि,हमे उत्तराखंड़ राज्य मांग कर नही मिला है बल्कि हमने ये राज्य छीनकर और 42 शहादातों के बाद लिया है. मातृसक्ति के त्याग और बलिदान से हमे राज्य मिला है. लेकिन इन 26 वर्षों में नेताओं व अधिकारियों ने राज्य को बर्बाद कर दिया है. कहा कि राजधानी गैरसैंण के सपने को लेकर राज्य आंदोलन लड़ा गया था,लेकिन इन 26 वर्षों में ये सरकारें स्थाई राजधानी को तय नही कर पाई है. कहा कि प्रदेश का दुर्भाग्य है कि, इन 26 वर्षों में 11 मुख्यमंत्री बन चुके हैं लेकिन अब तक राजधानी का पता नही है. केके डिमरी ने कहा कि उत्तराखंड में वो लोग प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो लोग न आंदोलन में रहे न लाठी-गोली खाई ना ही उनके परिवार से किसी व्यक्ति ने राज्य निर्माण के लिए अपनी शहादत दी।

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि, ये राज्य हमे कई शहादतों के बाद मिला है और इसमे सभी धर्मों और वर्गों के लोग शामिल थे। कहा कि ये उत्तराखंड उन सबका है जो उत्तराखण्ड के साथ जुड़े हुए हैं और इस राज्य को बेहतर बनाना चाहते हैं.कहा कि ये उन सभी का उत्तराखंड़ है जिन्होंने इस बनाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी. कहा कि इन 26 वर्षों में कौन कौन सत्ता में रहा उनसे हिसाब लेना का समय आ गया है. कहा कि रोजगार,शिक्षा, स्वास्थ्य के बीच जाती और धर्म का झगड़ा नही होना चाहिए। उन्होंने भाजपा कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ये वो सरकारें रही है जो गैरसैंण को इन 26 वर्षों में केवल राजनेतिक लाभ लेने के लिए उपयोग करते रहे. कहा कि,अब समय आ गया है कि इन पहाड़ विरोधी सरकारों को उखाड़ फेंका जाय।

उत्तराखंड क्रांति दल युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने कहा कि उत्तराखंड़ क्रांति दल लगातार जनजागृति यात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही है, कहा कि इस बार जनता भाजपा-कांग्रेस को उखाड़ फेंकने का मन बना चुकी है, और प्रदेश में यूकेडी की सरकार बनने जा रही है.कहा कि जनता इस बार भाजपा-कांग्रेस के नाम पर वोट नही देगी और किसी भी नेता के प्रलोभन मैं नही आने वाली है. इस बार जनता गैरसैण राजधानी के नाम पर वोट देना का मन बना चुकी है। इस दौरान स्थाई राजधानी गैरसैंण समिति द्वारा उपजिलाधिकारी अंकलेश नोडियाल के माध्यम से प्रधानमंत्री को स्थाई राजधानी की मांग को लेकर ज्ञापन भी प्रेषित किया गया।

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