हरक सिंह रावत के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने देहरादून एसएसपी कार्यालय पर पुलिस के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन।
देहरादून:-27 अगस्त 2026
उत्तराखंड कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने आज 27 अगस्त को परेड ग्राउंड से लेकर एसएसपी कार्यालय तक आक्रोश रैली निकाली। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ निकाली गई रैली के दौरान कांग्रेसियों ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता सूरत सिंह नेगी पर झूठे मुकदमे दर्ज करके उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए एसएसपी ऑफिस का मुख्य गेट बंद कर दिया था, फिर भी हरक सिंह समेत कुछ कांग्रेसी नेता नारेबाजी करते हुए कार्यालय के अंदर पहुंच गए, जबकि कुछ लोगों को पुलिस ने बाहर रोक दिया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पुलिस पर सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दबाव में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की।
हरक सिंह रावत का कहना है कि खनन, भूमि और स्थानीय जनसमस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं एवं आम लोगों को पुलिस कार्रवाई के नाम पर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मालदेवता चौकी प्रभारी ने स्थानीय विधायक के दबाव में कांग्रेस नेता के खिलाफ पुराने मामलों को आधार बनाकर कार्रवाई की गई है। उनका कहना है कि जिन मामलों को लेकर कार्रवाई की जा रही है,उनमें कुछ सिविल मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं और संबंधित मामलों में हाईकोर्ट से भी राहत मिली हुई है। इसके बावजूद पुलिस की ओर से उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब पार्टी कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में कथित खनन गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए और विधायक की पत्नी के नाम पर खनन पट्टे व क्रशर से जुड़े आरोपों को सार्वजनिक किया,तो कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई का दबाव बढ़ गया।इसी तरह प्रेमनगर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति और पत्रकार ने कथित भूमि माफिया के खिलाफ आवाज उठाई तो उन्हें थाने में बैठाया गया। जब इसका विरोध किया गया तो दबाव के बाद उन्हें छोड़ा गया।कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति सड़क, खनन, भूमि या भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सवाल उठाता है तो क्या उसके परिवार और करीबियों को भी परेशान किया जाएगा?
हरक सिंह रावत ने कहा कि पुलिस का काम कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करना है,न कि किसी राजनीतिक दबाव में काम करना।उन्होंने कहा कि अपराध का कोई राजनीतिक दल, जाति या धर्म नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है तो पुलिस को कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन निर्दोष लोगों को केवल राजनीतिक दबाव में परेशान करना उचित नहीं है।हरक ने कहा कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को संविधान और कानून के अनुरूप निष्पक्षता से काम करने की शपथ दिलाई जाती है. इसलिए पुलिस को सत्ता में बैठे किसी भी व्यक्ति के दबाव में आकर कार्रवाई करने के बजाय न्याय और कानून के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मामलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेश में जहां भी किसी व्यक्ति के साथ अन्याय होगा, कांग्रेस उसकी आवाज उठाएगी। उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस आज भी न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रही है और प्रदेश की बेटियों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आगे भी आवाज उठाती रहेगी।कांग्रेस ने एसएसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और राजनीतिक दबाव में की जा रही कथित पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। नेताओं ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सरकार और जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछना जनता और विपक्ष का अधिकार है और सवाल उठाने वालों को डराने या दबाने के बजाय उनकी शिकायतों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
