10 दिन की डेडलाइन:आदेश मानिए या सजा सुनने के लिए हाजिर हों चीफ इंजीनियर-हाइकोर्ट
नैनीताल:-17 जुलाई 2026
उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने अवमानना के आरोपी को दस दिन के भीतर आदेशों का पालन करने अन्यथा ग्यारवें दिन सजा सुनने के लिए उपस्थित होने का आदेश दिया है।एकलपीठ ने पूर्व में खंडपीठ के एक आदेश को नहीं मानने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका में चीफ इंजीनियर को नोटिस जारी किया।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पीएमजीएसवाई के मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक और अन्य को अदालत की अवमानना अधिनियम 1971 के तहत ‘जानबूझकर आदेश की नाफरमानी’ करने का दोषी पाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों द्वारा बाद की परिस्थितियों का बहाना बनाकर न्यायिक आदेशों को दरकिनार या निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता।
यह पूरा मामला मेसर्स राम कृष्ण जयरा द्वारा विभाग की एक निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से जुड़ा है। जिसमें तकनीकी मूल्यांकन के दौरान याचिकाकर्ता फर्म को गलत तरीके से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके खिलाफ फर्म ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। करीब डेढ़ साल तक लंबित रहने के बाद कोर्ट ने 26 फरवरी 2026 को याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता फर्म की वित्तीय बोली को शामिल किया जाए। कानून के अनुसार प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। लेकिन रिट कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद विभाग ने वित्तीय बोली खोलने के बजाय पूरी टेंडर प्रक्रिया को यह कहते हुए रोक दिया कि अन्य बोलीदाताओं ने अपनी निविदा की वैधता अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है। प्रतिवादियों की ओर से तर्क दिया गया कि अब केवल एक ही बोलीदाता बचा है, जिससे टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती। हाईकोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह स्थिति खुद उत्तरदाताओं द्वारा पैदा की गई है और यह केवल एक सोची-समझी रणनीति है ताकि रिट कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी और विफल किया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद चीफ इंजीनियर के खिलाफ चार्जेज फ्रेम(सजा तय) किये और उन्हें दस दिन का समय देकर खंडपीठ के आदेशों का पालन करने को कहा। अदालत ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो मुख्य अभियंता को सजा भुगतने के लिए अगली तारीख 27 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा। मामला उत्तरकाशी का है। एकलपीठ ने ये भी कहा कि ऐसा नहीं करने पर अगली सुनवाई पर उनके खिलाफ सजा सुनाई जाएगी, जिसमें वो उपस्थित रहें।
