मवेशी चराने गए 69 वर्षीय बुजुर्ग की बाघ के हमले में मौत,ग्रामीणों में दहशत।
खटीमा (उधमसिंह नगर)-12 जनवरी 2026
उत्तराखण्ड में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता ही जा रहा है। मानव वन्य जीव संघर्ष की ऐसी ही एक दुखद एवं हृदयविदारक खबर आज उधमसिंह नगर जिले के खटीमा क्षेत्र से सामने आ रही है,जहां सुरई वन रेंज के बग्गा चौवन इलाके में बाघ के हमले में 69 वर्षीय ग्रामीण शेर सिंह कन्याल की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना से जहां मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है वहीं पूरे इलाके में भी डर और आक्रोश व्याप्त है।मिल रही जानकारी मुताबिक मूल रूप से राज्य के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा तहसील क्षेत्र के दूरस्थ गांव बग्गा चौवन निवासी शेर सिंह कन्याल रोज की तरह बीते रविवार सुबह अपने मवेशियों को जंगल की ओर चराने ले गए थे। बताया गया है कि शाम होते-होते मवेशी तो घर लौट आए, लेकिन शेर सिंह के न लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई। जंगल में तलाश शुरू की गई, लेकिन अंधेरा घिर जाने के कारण खोजबीन में दिक्कत आई। इसके बाद ट्रैक्टर की रोशनी में जब दोबारा जंगल खंगाला गया तो कुछ दूरी पर शेर सिंह की जैकेट पड़ी मिली। आसपास जमीन पर घसीटने के निशान भी साफ नजर आए।
निशानों का पीछा करते हुए ग्रामीण जब आगे बढ़े तो जंगल के भीतर शेर सिंह का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। ग्रामीणों का दावा है कि घटना स्थल के आसपास उन्होंने दो बाघों को भी देखा। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए नागरिक चिकित्सालय खटीमा भेजा गया। सोमवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। घर में मातम पसरा है और परिजन सदमे में हैं।
घटना के बाद वन विभाग ने सुरई वन रेंज में सतर्कता बढ़ा दी गई है। रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मौके पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं और वन कर्मियों की गश्त को वन सीमा से सटे गांवों में बढ़ाया गया है। ग्रामीणों से फिलहाल जंगल की ओर न जाने की अपील की गई है। साथ ही बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने को लेकर उच्चाधिकारियों से निर्देश मांगे गए हैं। मृतक के परिजनों को वन अधिनियम के तहत मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस घटना ने क्षेत्र में मानव–वन्यजीव संघर्ष को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए वन विभाग से त्वरित और ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र से सटे गांवों की सीमा से कम से कम एक किलोमीटर के दायरे में फेंसिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों में प्रवेश न कर सकें। इससे न सिर्फ ग्रामीणों की सुरक्षा होगी, बल्कि पशुपालन और आजीविका से जुड़े उनके अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे। विधायक ने मृतक परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने की भी मांग की है।
