नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तरकाशी गैंगरेप मामले में आरोपियों को राहत न देते हुए याचिका की खारिज।

नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तरकाशी गैंगरेप मामले में आरोपियों को राहत न देते हुए याचिका की खारिज।

नैनीताल:-17 जून 2026

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तरकाशी में वर्ष 2017 में हुए चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोष सिद्ध अभियुक्तों को बड़ी राहत देने से इनकार करते हुए उनकी अपीलें खारिज कर दी हैं। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने सत्र न्यायालय, उत्तरकाशी द्वारा सुनाई गई सजा को सही ठहराते हुए कहा कि, अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा है।

मामले में अभियुक्त मनीष अवस्थी, आशीष बिजल्वाण और अजय भट्ट को सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) के अपराध में दोषी ठहराते हुए दी गई 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा गया। अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि उनके विरुद्ध कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक और साइंटिफिक एविडेंस उपलब्ध नहीं हैं और पीड़िता के बयान में विरोधाभास हैं, इसलिए उन्हें दोषमुक्त किया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने कहा कि, दुष्कर्म के मामलों में पीड़िता का विश्वसनीय और भरोसेमंद बयान अपने आप में पर्याप्त साक्ष्य हो सकता है। न्यायालय ने पाया कि पीड़िता ने घटना का क्रमबद्ध और स्पष्ट विवरण दिया है, जिसे उसके मित्र, अन्य गवाहों और घटनास्थल के साक्ष्यों से पर्याप्त समर्थन मिलता है. केवल चिकित्सकीय रिपोर्ट में चोटों या वीर्य के निशान न मिलने से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं हो जाता।

न्यायालय ने यह भी माना कि, घटना के समय पीड़िता भयभीत थी और बाद में उसने स्नान भी कर लिया था। इसके अतिरिक्त वह उस समय मासिक धर्म की अवस्था में थी. ऐसे में चिकित्सकीय और फोरेंसिक साक्ष्यों का अभाव घटना को असत्य साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।

राज्य सरकार ने भी एक अलग अपील दाखिल कर अभियुक्त विजय शंकर नौटियाल को गैंगरेप, बंधक बनाने और धमकी देने के आरोपों से बरी किए जाने को चुनौती दी थी। हालांकि हाईकोर्ट ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह सिद्ध नहीं होता कि विजय शंकर नौटियाल ने सामूहिक दुष्कर्म में सक्रिय भागीदारी की थी। उसके विरुद्ध केवल मारपीट का आरोप सिद्ध हुआ था, जिसके लिए निचली अदालत ने उसे दोषी ठहराया था। खंडपीठ ने कहा कि यदि विजय शंकर नौटियाल की सामूहिक दुष्कर्म में समान मंशा होती तो वह अन्य अभियुक्तों के साथ पीड़िता का पीछा करता और उसे उस स्थान तक ले जाता जहां बाद में दुष्कर्म की घटनाएं हुईं। रिकॉर्ड से ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, इसलिए उसकी आंशिक बरी को सही माना गया। इन निष्कर्षों के साथ हाईकोर्ट ने मनीष अवस्थी और अन्य अभियुक्तों की आपराधिक अपीलें खारिज कर दीं. साथ ही राज्य सरकार की अपील भी निरस्त करते हुए सत्र न्यायालय, उत्तरकाशी के 21 मई 2018 के फैसले को पूर्ण रूप से बरकरार रखा।

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