हरक सिंह रावत भाजपा सरकार पर हुए हमलावर,मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के बंदरबांट का लगाया आरोप,कहा-अपने ही कार्यकर्ताओं को बांट दी राशि।

हरक सिंह रावत भाजपा सरकार पर हुए हमलावर,मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के बंदरबांट का लगाया आरोप,कहा-अपने ही कार्यकर्ताओं को बांट दी राशि।

देहरादून-17 मार्च 2026

उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस पार्टी के चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने सरकार पर मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। हरक सिंह रावत ने इसे कई सौ करोड़ रुपए का घोटाला बताया है। उनका कहना है कि इस कोष की बंदरबांट की जा रही है और कुछ लोगों को खुश करने के लिए और राजनीतिक लाभ उठाने के लिए सरकार मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष का दुरुपयोग कर रही है।

हरक सिंह रावत ने कहा कि किसी जरूरतमंद को लाभ देने की बजाय अपने कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत लाभ दिए जा रहे हैं। यह सब छोटे स्तर पर नहीं हो रहा है बल्कि सुंयोजित तरीके से राजनीतिक फायदे के लिए कोष का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीएम विवेकाधीन कोष का मुद्दा उठाते हुए हरक सिंह ने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर वह इस बात को कह रहे हैं।उधम सिंह नगर और चंपावत जिले से सूचनाओं मांगी गई थी कि किन-किन लाभार्थियों को इस कोष से लाभ मिला। उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि दोनों ही जिलों में भाजपा से जुड़े हुए पदाधिकारियों और उनके परिजनों को प्रतिवर्ष मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से लाभ दिया गया। हरक सिंह रावत का कहना है कि पहले तो सूचनाओं को देने में लेटलतीफी की गई, उसके बाद आधी अधूरी सूचनाएं दी गई।ह उसके बावजूद जो सूचनाओं दी गई वह बहुत चौंकाने वाली थी। उधम सिंह नगर और चंपावत जिले मुख्यमंत्री से संबंधित जिले रहे हैं. जहां दोनों जिलों में भाजपा से जुड़े हुए पदाधिकारियों और उनके परिजनों को हर साल इस कोष से लाभ दिया जा रहा है, जो सीधे तौर पर जनता के धान का दुरुपयोग है। हरक सिंह रावत ने ऐसे कई नामों का उल्लेख किया है जिनको मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है।

उनका कहना है कि अगर पूरे प्रदेश के सभी जिलों के आंकड़े सामने आ जाए तो यह उत्तराखंड के इतिहास का सबसे बड़ा भ्रस्टाचार साबित होगा. उन्होंने मांग उठाई कि कोष की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना है कि इसी तरह अन्य जनपदों में सूचना लगाई जा रही है. लेकिन उपलब्ध करवाने में समय लगाया जा रहा है और अधूरी सूचनाएं दी जा रही है।

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