ग्रीन सेस वसूली में शरारती तत्व लगा रहे है बट्टा, इन पर लगाम लगाना विभाग के लिए बड़ी चुनौती!
उत्तराखंड- 09 अप्रैल 2026
परिवहन विभाग की ओर से अन्य राज्यों से उत्तराखंड आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूला जा रहा है। ऐसे में विभाग को उम्मीद है कि आगामी चारधाम यात्रा के दौरान अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से अच्छी खासी ग्रीन सेस की वसूली हो सकती है। क्योंकि हर साल चारधाम यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में वाहन उत्तराखंड में प्रवेश करते हैं। लेकिन कुछ शरारती तत्व, विभाग की उम्मीदों पर बट्टा लगा रहे हैं। दरअसल, नारसन बॉर्डर के साथ ही अन्य क्षेत्रों में लगे एएनपीआर के केबल को शरारती तत्व काट दे रहे है। जिसके चलते विभाग अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने में दिक्कतें हो रही है। आखिर क्या है स्थिति, इससे निपटने के लिए क्या है विभाग का प्लान? देखिए इस रिपोर्ट में……….
उत्तराखंड में अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस के जरिए रोजाना करीब 20 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हो रहा है। अभी तक करीब 6 करोड़ रुपए का राजस्व एकत्र हो गया है। तो वही, आगामी चारधाम यात्रा के दौरान विभाग को उम्मीद है कि अच्छी खासी ग्रीन सेस कलेक्शन की उम्मीद है। लेकिन ग्रीन सेस कलेक्शन में शरारती तत्व के साथ ही बिजली कटने की समस्या एक बड़ी चुनौती बन रहे है। हालांकि, विभाग की ओर से बिजली कटने की समस्या से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने जा रहा है। लेकिन शरारती तत्वों की ओर से कैमरे की केबल का काटना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। क्योंकि इसके लिए आईटीडीए के सर्वर में स्पेस को बढ़ाना होगा, जिसमें समय लगने की संभावना है।
दरअसल, परिवहन विभाग ने 17 जनवरी 2026 से हरिद्वार जिले के नारसन बॉर्डर से ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद 15 फरवरी 2026 से प्रदेश के 15 बॉर्डर्स एरिया से ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके बाद से ही ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया चल रही है। सभी चेक पोस्ट से ग्रीन सेस कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अभी तक परिवहन विभाग को 6 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त हो चुका है। जबकि विभाग ने एक साल में करीब 100 करोड़ रुपए का राजस्व एकत्र करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन ग्रीन सेस कलेक्शन में ये समस्याएं एक बड़ी चुनौती बन रही है।
वही, इस विषय पर अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने कहा कि ग्रीन सेस वसूलने की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो गई है। शुरुआती दौर में ग्रीन सेस वसूलने की टेस्टिंग और ट्रायल प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है, साथ ही धनराशि भी आनी शुरू हो गई है। ऐसे में जल्द ही ग्रीन सेस व्यवस्था का विधिवत रूप से शुभारंभ भी किया जाएगा। हालांकि, शुरुवाती दौर में कुछ दिक्कतें भी आती है, क्योंकि पहले ही अधिसूचना जारी होने के बाद ग्रीन सेस वसूल नहीं पा रहे थे। जिसकी मुख्य वजह यही थी कि चेक पोस्ट को खत्म कर दी गई थी जिसके चलते मैनपॉवर वहा पर नहीं थी। लेकिन फिर ग्रीन सेस वसूलने के लिए डिजिटल का सहारा लिया गया और ऑटोमेटिक ग्रीन सेस वसूलने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, शुरुआती दौर में इसका विरोध भी हुआ, साथ ही तमाम शिकायतें भी विभाग को प्राप्त हुई। इसके साथ ही कुछ जगहों पर लगे एएनपीआर के केबल काटने की समस्याएं भी आई। जिसके तहत धर्मपुर में दो बार एएनपीआर का केबल कटने का मामला सामने आया, काशीपुर और नारसन बॉर्डर पर लगे कैमरों का भी केबल काट दिया गया। जबकि नारसन बॉर्डर पर काफी अधिक ट्रैफिक होता है। कैमरे का केबल काटने की वजह से वाहनों से ग्रीन सेस नहीं वसूला जा सका। हालांकि, विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए सर्विलांस कैमरे भी लगे हैं, जिसमें वहा की गतिविधियां रिकॉर्ड होती है।
लेकिन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है कि बॉर्डर क्षेत्र में लगे सर्विलांस कैमरे के जरिए आरोपियों को पकड़ा जाना संभव नहीं है। जिसकी मुख्य वजह यही है कि आईटीडीए के सर्वर में स्पेस की कमी होने के चलते सर्विलांस कैमरे और बुलेट कैमरे से रिकॉर्ड होने वाले डेटा का बैकअप सिर्फ एक दिन के लिए ही है। जिसके चलते जब केबल कटने की जानकारी मिलती है और उसको वेरीफाई करते हैं तो ये जानकारी नहीं मिल पाती है कि वहा क्या हुआ होगा? ऐसे में विभाग की कोशिश है कि बॉर्डर्स क्षेत्रों में लगे सर्विलांस कैमरे और बुलेट कैमरे का डाटा एक महीने तक रुकने लगे, जिससे वहां हो रही गतिविधियों की जानकारी मिल पाएगी और केबल किसने काटा है उसका भी पता लगाया जा सकेगा। और उस पर कार्रवाई की जा सकेगी। साथ ही बताया कि असामाजिक तत्वों के अलावा बिजली कटने की समस्या भी ग्रीन सेस वसूलने में एक बड़ी बाधा बन रही है। क्योंकि बॉर्डर क्षेत्र में काफी अधिक बिजली कटता है जबकि यूपीएस का बैकअप अधिक नहीं होता है। ऐसे में विभाग कोशिश कर रहा है कि कुछ बॉर्डर क्षेत्र में जनरेटर लगा दिए जाए। खासकर नारसन बॉर्डर जनरेटर लगाने पर जोर दिया जा रहा है क्योंकि उत्तराखंड में आने वाला कुल ट्रैफिक का अकेले 40 से 50 फीसदी ट्रैफिक नारसन बॉर्डर से उत्तराखंड में आता है। ऐसे में विभाग का प्लान है कि कुछ जगहों पर जनरेटर और कुछ जगहों पर बड़े यूपीएस की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि, इन सब को मेंटेन करने के लिए मैनपावर की भी जरूरत होगी जिस पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि उनकी सुरक्षा भी बनी रहे।
अपर परिवहन आयुक्त ने कहा कि अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से ही ग्रीन सेस वसूला जा रहा है। और उन वाहनों को चिन्हित वाहनों के नंबर प्लेट से किया जाता है। लेकिन उत्तराखंड में रहने वाले कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके पास अन्य राज्यों में रजिस्टर्ड वाहन है, जो अपने वाहन को उत्तराखंड में ट्रांसफर नहीं कर रहे होते हैं। और ये लोग जब अन्य राज्यों से आकर उत्तराखंड का बॉर्डर क्रॉस करते हैं तो उन लोगों से भी ग्रीन सेस वसूला जाता है। ऐसे में उन्हें लगता है कि केबल कटने जैसी गतिविधियां अन्य राज्यों या बाहर से आने वाले लोग नहीं कर सकते हैं। लेकिन आसपास के रहने वाले लोग जिनका वाहन अन्य राज्यों में रजिस्टर्ड है वह इस तरह का काम कर सकते हैं, इसके अलावा कुछ शरारती तत्व भी हो सकते हैं जो बेवजह भी ऐसा काम कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक चार मामले सामने आ चुके हैं। जिसका निदान जल्द ही किया जाएगा।
