प्रधानमंत्री का उत्तराखंड दौरा,8 हजार करोड़ रुपए की परियोजना की देंगे सौगात।

प्रधानमंत्री का उत्तराखंड दौरा,8 हजार करोड़ रुपए की परियोजना की देंगे सौगात।

उत्तराखंड-07 मई 2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार दोबारा उत्तराखंड आने वाले हैं। इस दौरान वह पूरे देश को करीब 8 हजार करोड़ रुपए की परियोजना की सौगात देंगे।

सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी इसी माह में उत्तराखंड के टिहरी आ सकते हैं। वह यहां टिहरी बांध की पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) परियोजना की चौथी यूनिट का औपचारिक लोकार्पण करेंगे। इस लोकार्पण के साथ ही यह परियोजना एशिया की सबसे बड़ी पीएसपी जल विद्युत परियोजना बन जाएगी।

पीएम मोदी के आगमन के लिए टिहरी के डीएम ने बुधवार को जिले के अधिकारियों के साथ बैठक की। गुरुवार को डीएम टिहरी प्लांट पहुंचकर निरीक्षण करेंगे और इसकी रिपोर्ट पीएमओ को भेजी जायेगी कि प्रोजेक्ट की क्या प्रगति है?

बता दें कि पिछले दिनों दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान ही पीएम मोदी को इस योजना का लोकार्पण करना था। प्रधामंत्री कार्यालय से इसे लेकर विधिवित कार्यक्रम भी जारी किया गया था, लेकिन ऐन मौके पर यह लोकार्पण रद कर दिया गया। कहा गया कि पीएम मोदी इस परियोजना का लोकार्पण करने के लिए बाद में टिहरी पहुंचेंगे।

अब कहा जा रहा है कि पीएम मोदी इसी माह टिहरी से देश को यह परियोजना समर्पित करेंगे। अनौपचारिक रूप से उक्त परियोजना शुरू हो चुकी है। पीएम मोदी औपचारिक रूप से इसका लोकार्पण करेंगे।इस परियोजना के पूर्ण संचालन से उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में बिजली आपूर्ति को स्थिरता मिलेगी। साथ ही यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की ओर से विकसित इस महत्वाकांक्षी पीएसपी परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 1000 मेगावाट है।परियोजना के तहत 250-250 मेगावाट की चार यूनिटें स्थापित की गई हैं। इनमें से तीन यूनिटों का संचालन पहले ही शुरू हो चुका है, जिनका लोकार्पण केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर की ओर से किया जा चुका है। चौथी यूनिट के शुरू होने के साथ यह परियोजना पूर्ण रूप से चालू हो गई है।

पंप स्टोरेज प्लांट एक आधुनिक और अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके पानी को ऊंचाई पर स्थित जलाशय में पंप किया जाता है और जरूरत के समय उसी पानी से बिजली उत्पादन किया जाता है। इससे ग्रिड संतुलन बनाए रखने और पीक डिमांड के समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

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