उद्धघाटन के इंतजार में 3 साल से धूल फांक रहा गैरसैंण का अत्याधुनिक आडिटोरियम,4 करोड 38 लाख खर्चने के बावजूद नहीं हो रहा उपयोग।

उद्धघाटन के इंतजार में 3 साल से धूल फांक रहा गैरसैंण का अत्याधुनिक आडिटोरियम,4 करोड 38 लाख खर्चने के बावजूद नहीं हो रहा उपयोग।

उपजिलाधिकारी बोले जल्द निरीक्षण कर की जाएगी अग्रिम कार्रवाई।

गैरसैंण :-28 जुलाई 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.

जिस सरकारी तंत्र पर आम जन की समस्याओं के निस्तारण की जिम्मेदारी होती है ,कभी-कभी वो तंत्र खुद ही कागजी खानापूर्तियों में उलझकर समस्याओं का कारण बन जाता है। ऐसा ही एक वाक्य पिछले तीन सालों से ग्रीष्मकालीन राजधानी के गैरसैंण नगर में देखने को मिल रहा है।

राजकीय इंटर कॉलेज गैरसैंण में लगभग साढे चार करोड रुपए की लागत से बने अत्याधुनिक बालकनी ऑडिटोरियम हॉल पर लटके हुए ताले इसकी गवाही दे रहे हैं। गैरसैंण नगर के महत्व को देखते हुए तब त्रिवेंद्र रावत सरकार ने अत्याधुनिक आडिटोरियम बनाने की घोषणा की थी,जिसके बाद 2020-21 में इसका काम शुरू होकर, 2023 में निर्माण कार्य पूरा कर लिए गया था। ऑडिटोरियम का निर्माण पूरा होने के साथ ही सभी आधुनिक उपकरण भी स्थापित कर लिए जाने के बावजूद इसका उपयोग न होने से जहां एक तरफ महंगे उपकरण धूल फांक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ऑडिटोरियम हॉल बंद होने से बरसात के दिनों में लगने वाली फंफूद से हाल की साउंड प्रूफ दिवारें,महंगे उपकरण,फर्नीचर व मैटिंग की भी खराब होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि 4 करोड़ 37 लाख 86 हजार की भारी भरकम धनराशि से राजकीय इंटर कॉलेज गैरसैंण की भूमि पर आधुनिक ऑडिटोरियम का निर्माण पूर्ण कर कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम यूनिट -2 श्रीनगर द्वारा नवंबर 2023 में ही इसे शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया था,लेकिन अब तक इसका ना तो विद्यालय द्वारा कोई उपयोग किया जा रहा है,ओर नाहीं किसी अन्य संस्था को उपयोग के लिए दिये जाने की कोई नीति बनाई गई है। बताया जा रहा है कि ऑडिटोरियम का उद्घाटन न होने से फिलहाल इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है,जिसके चलते आडिटोरियम पर ताले लटके हुए हैं।

लगभग 250 दर्शकों की क्षमता वाले बालकनी के साथ बने अत्याधुनिक ऑडिटोरियम हॉल में महंगी पुशबैक कुर्सियां लगी हुई है, जिसके साथ ही विशाल एलईडी ,पब्लिक ऐड्रेसिंग सिस्टम,ऑडियो-वीडियो सिस्टम,पोडियम,मेटिंग,महंगे पर्दों के साथ ही हाल में बनी साउंड प्रूफ दीवारें भी बनी हैं,जिनके रखरखाव की कोई विभागीय व्यवस्था न होने से इन पर धूल जम रही है।वहीं बरसात में लगने वाली फंफूद भी नुकसानदायक साबित हो रही है।

मामले को लेकर विद्यालय के प्रधानाचार्य कलम सिंह कठायत कहते हैं की ,इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को संचालित करने के लिए विद्यालय के पास कोई तकनीकी व्यक्ति नहीं है ,जिससे फिलहाल इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। वहीं,मामले में निर्माणदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम यूनिट -2 श्रीनगर के प्रोजेक्ट मैनेजर सुनील फरस्वाण का कहना है की,उनके द्वारा नवंबर 2023 में ही निर्माण सहित ऑडिटोरियम में सभी जरूरी उपकरण स्थापित कर विधालय को हस्तांतरित कर दिया गया है,जिसको लेकर हमारे स्तर से कोई भी कागजी कार्रवाई शेष नहीं है।

हालिया दिनों में गैरसैंण स्थानांतरित होकर आए खंड शिक्षा अधिकारी एनी नाथ ने बताया कि उन्होंने विद्यालय से जानकारी लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों को अवगत करा दिया है,ऑडिटोरियम के उपयोग को लेकर अग्रिम निर्देशों के अनुसार काम किया जाएगा।

उप जिलाधिकारी गैरसैंण अबरार अहमद ने कहा कि “उत्तराखंड अपडेट” के माध्यम से मामले की जानकारी मिली है,शिक्षा विभाग को निर्देशित कर जल्द ही ऑडिटोरियम का निरीक्षण कर इसे शुरू करवाने की कार्यवाही की जाएगी।

मामले को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी ने कहा कि जनहित के उपयोग के लिए बनाये गये आडिटोरियम को बने हुए 3 साल हो गए हैं,जो रखरखाव के अभाव में धूल फांक रहा है। लेकिन विभागीय स्तर से उद्घाटन ना होने से आमजन इसका उपयोग नहीं कर पा रहा है,जबकि इस बारे में पहले भी शासन स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है।

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