चमोली के एरेठा गांव में सड़क के इंतजार में बीत गए पांच साल, महिला को डंडी-कंडी से अस्पताल पहुंचाने को मजबूर हुए ग्रामीण।
देवाल (चमोली):- 07 जून 2026
रिपोर्ट- गिरीश चंदोला.
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत एक बार फिर सामने आई है,जहां चमोली जिले के देवाल विकासखंड के दूरस्थ एरेठा गांव में सड़क के अभाव में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला को ग्रामीणों ने डंडी-कंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाया। महिला ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल में एक स्वस्थ नवजात को जन्म दिया,जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं,लेकिन इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राम प्रधान राजेंद्र कुमार टम्टा के मुताबिक, एरेठा गांव, ग्राम सभा औडर का अनुसूचित जाति बाहुल्य तोक है, जहां 60 से ज्यादा परिवारों की करीब 250 आबादी निवास करती है। गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए देवाल से पदमला-कंजेरू-एरेठा-औडर तक 8 किलोमीटर मोटर मार्ग को 15 दिसंबर 2021 को स्वीकृति मिली थी, लेकिन सालों बाद भी सड़क निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सका है।
गर्भवती महिला को डोली पर लादकर पैदल चले ग्रामीण⤵️
रविवार को भी एरेठा गांव की गम्मोती देवी पत्नी प्रकाश राम (उम्र 34 वर्ष) को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें डंडी-कंडी के सहारे पैदल मार्ग से मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद वाहन की मदद से उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल ले जाया गया, जहां उन्होंने नवजात को जन्म दिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित सड़क का निर्माण पदमला क्षेत्र में भूमि विवाद और खेतों से सड़क गुजरने को लेकर उठी आपत्तियों के कारण अटक गया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) ने करीब एक साल पहले दोबारा सर्वेक्षण भी किया था, लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
क्या बोले जिम्मेदार विभाग?
वहीं, सड़क निर्माण को लेकर विभागीय स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं दिख रही है। लोक निर्माण विभाग का कहना है कि अब यह कार्य पीएमजीएसवाई के माध्यम से किया जाना है। जबकि, पीएमजीएसवाई का कहना है कि वन भूमि संबंधी स्वीकृतियां और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही सड़क कटिंग का कार्य शुरू किया जा सकेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क नहीं होने से क्षेत्र के ग्रामीण आज भी आपातकालीन परिस्थितियों में भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. बीमारों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को कई किलोमीटर पैदल या डंडी-कंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से सड़क निर्माण की बाधाओं को दूर कर जल्द कार्य शुरू कराने की मांग की है।
