देहरादून में फर्जी पत्रकार बनकर ब्लैकमेलिंग का आरोप,साढ़े तीन लाख वसूलने के बाद मांगे 5 लाख,पुलिस ने दबोचा।
देहरादून:-27 अगस्त 2026
उत्तराखंड के देहरादून के प्रेमनगर इलाके में खुद को पत्रकार बताकर एक व्यक्ति पर ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली करने का आरोप लगा है। आरोप है कि दुकानों के निर्माण को लेकर झूठी खबर प्रसारित करने की धमकी देकर आरोपी ने करीब साढ़े तीन लाख रुपये वसूल लिए। इसके बाद भी रकम की मांग जारी रही और कथित तौर पर 5 लाख रुपये और मांगे गए। शिकायत मिलने के बाद प्रेमनगर पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
दुकानों को लेकर दी खबर चलाने की धमकी।
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक,ठाकुरपुर लक्ष्मीपुर निवासी राकेश कुमार ने बताया कि उनके परिचित प्रकाश चंद की करीब 250 गज जमीन पर छह दुकानों का निर्माण हुआ है। इसी दौरान रजत सिंह नाम के व्यक्ति ने खुद को पत्रकार बताते हुए कथित तौर पर कहा कि वह इन दुकानों को गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन पर बना हुआ बताकर अपने चैनल पर खबर प्रसारित कर देगा। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खबर रोकने के बदले आरोपी ने अलग-अलग मौकों पर रकम की मांग की। दबाव में आकर करीब ढाई लाख रुपये नकद और 97 हजार रुपये UPI के जरिए दिए गए।
रकम लेने के बाद भी नहीं रुकी मांग।
शिकायतकर्ता के अनुसार, पैसे मिलने के बावजूद आरोपी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर दोबारा संपर्क किया और 5 लाख रुपये की अतिरिक्त रकम मांगी। आरोप है कि मांग पूरी नहीं करने पर झूठी खबर प्रसारित करने की धमकी दी गई। शिकायत में जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेमनगर कोतवाली पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड समेत अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाया।
जांच के बाद मुख्य आरोपी गिरफ्तार।
जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने रजत सिंह को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक आरोपी की उम्र 28 वर्ष है और वह सहसपुर का रहने वाला है। उसके खिलाफ पहले भी एक आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
दो अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी।
पुलिस अब मामले में नामजद दो अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। बिना पर्याप्त प्रमाण किसी व्यक्ति के खिलाफ उत्पीड़न या अनावश्यक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
