छह माह बाद भी नहीं सुलझा सारकोट भूमि विवाद,चार बार मिली तारीखें,लेकिन बयान तक दर्ज नहीं।

छह माह बाद भी नहीं सुलझा सारकोट भूमि विवाद,चार बार मिली तारीखें,लेकिन बयान तक दर्ज नहीं।

तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल,जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री दफ्तर तक लगाई गुहार।

सारकोट गांव में गलत तरीके से बेची गयी पुस्तैनी जमीन को बचाने को पिडित परिवार ने तारबाड का लिया सहारा।

गैरसैंण:-17 सितंबर 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला।

ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर से सटे मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट गांव में भूमि विवाद का मामला छह माह बाद भी नहीं सुलझ पाया है,जिसको लेकर अब तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। भूमि की खरीद बिक्री कर तहत रजिस्ट्री ओर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन न किए जाने से ग्रामीण की करीब साढ़े 17 नाली पुश्तैनी भूमि भी गलत तरीके से बेच दी गयी। मामले में भूमी की गलत रजिस्ट्री को लेकर लगातार 5 माह की शिकायत के बाबजूद प्रशासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर,पिडित परिवार कर्ज लेकर जमीन पर तारबाड कर अपनी पुस्तैनी भूमि को बचाने को मजबूर है।

गौरतलब है की मई माह में सारकोट गांव में 50 नाली भूमि की खरीद का प्रकाश में आया था,तब तकनीकी खामियों के चलते रजिस्ट्रार कार्यालय कर्णप्रयाग द्वारा 15 नाली भूमि की रजिस्ट्री को निरस्त किए जाने के बाद कुल 35 नाली भूमि की रजिस्ट्री की गयी थी। जिसको लेकर ग्रामीण मदन सिंह पुत्र मकड़ सिंह का कहना है कि उन्होंने शुरूआत में ही भूमि की गलत माप-जोख की आशंका को लेकर अप्रैल माह में ही तहसीलदार गैरसैंण को पत्र देकर जांच की मांग की थी। इसके बावजूद 13 मई को भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई। जिसके बाद पीड़ित पक्ष ने जून माह में तहसील प्रशासन के साथ ही जिलाधिकारी चमोली से मामले की जांच की मांग की। तब जिलाधिकारी चमोली द्वारा एडीएम की अध्यक्षता में टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए थे।

शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, जांच के निर्देश के करीब तीन माह बाद भी जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। उनका यह भी आरोप है कि उन्हें अब तक अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर नहीं मिला है। रजिस्ट्री व दाखिल-खारिज प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किए जाने की शिकायत के बाद तहसील प्रशासन ने मदन सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए अब तक चार तारीखें तो निर्धारित की,लेकिन किसी भी तारीख पर उनका बयान दर्ज नहीं हो सका।

4 माह से प्राइवेट नौकरी छोड अपनी पुस्तैनी जमीन बचाने की लड़ाई लड रहे मदन सिंह के पुत्र सुरेंद्र सिंह के अनुसार,उन्हें पहली बार 23 जुलाई, इसके बाद 7 अगस्त, 22 अगस्त और फिर 9 सितंबर को तहसील में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था। इन तिथियों पर तहसीलदार के मौजूद नहीं होने के कारण उनका बयान नहीं लिया जा सका। बताया गया कि पहले एसआईआर की ड्यूटी और बाद में तबीयत खराब होने के कारण तहसीलदार उपस्थित नहीं थे।

सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की अपने स्तर से गहन जांच के बाद उन्हें पता चला कि गांव के प्राथमिक विद्यालय के समीप की उनके परिवार की करीब साढ़े 17 नाली भूमि गलत तरीके से बेची गयी है। उन्होंने मामले की शिकायत तहसील प्रशासन, जिलाधिकारी, गढ़वाल आयुक्त के साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि छह माह से कार्रवाई नहीं होने के कारण परिवार को अपनी पुश्तैनी भूमि की सुरक्षा के लिए रिश्तेदारों से उधारी लेकर जमीन बचाने को तारबाड़ करनी पड़ी है। शिकायतकर्ता पक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच कर भूमि संबंधी अभिलेखों और रजिस्ट्री प्रक्रिया की जांच करने तथा दोष पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

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