होमकुंड में मां नंदा तथा चैसिंग्या खाडू की कैलास को अश्रु पूर्ण विदाई।

होमकुंड में मां नंदा तथा चैसिंग्या खाडू की कैलास को अश्रु पूर्ण विदाई

देवाल (चमोली):-20 सितंबर 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट.

वेद मंत्रोच्चार, धार्मिक रीति रिवाजों तथा पूजा अर्चना के पश्चात मां नंदा की बड़ी जात में शामिल चैसिंग्या खाडू को कैलास के लिए भाव पूर्ण विदाई दी गई। 5 सितंबर से जन सैलाब के साथ चल रहे खाडू को जब मार्मिक विदाई दी गई तो यह खाडू भी अपने आसुओं को नहीं रोक पाया। इस तरह इस साल आयोजित हुई नंदा की बड़ी जात का उच्च हिमालय में स्थित होमकुंड में यज्ञ के बाद समापन हो गया। इसके साथ ही दशोली तथा बंड की देवडोलियां भी नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ को रवानगी कर गई हैं।

मेरी मैत की घ्याणी तेरू बाटू हेरदू रोलू, जा मेरी गौरा, जा तू शिव का कैलास।

रविवार को प्रातः नंदा बड़ी जात यात्रा के तहत शिलासमुद्र से नंदा की डोलियां, छंतोलियों संग सैकड़ों नंदा भक्त होमकुंड को रवाना हुए.शिलासमुद्र में धार्मिक पूजा अर्चना के बीच यह यात्रा होमकुंड को प्रस्थान कर गई। इस दौरान मां नंदा के उद्घोष के साथ यात्रा आगे बड़ी। शिलासमुद्र से आगे धीधोपिया में यात्रा पहुंची तो यहां पर भी लोग कुछ देर के लिए रूके। कहा जाता है कि नंदा देवी ने ही इस शिला को यहां पर खड़ा किया। इस शिला के बाहर एक रेखा खीची गई है। देवी ने थके यात्रियों के मनोरंजन के लिए नियम बनाया है कि इस शिला पर प्रत्येक यात्री रेखा के बाहर खड़े होकर घी फेंकेगा। इस नजारे को देख कई यात्री ठहाका लगाने से अपने को नहीं रोक पाते। इसके बाद यात्री दल अंतिम पड़ाव होमकुंड पहुंचा। होमकुंड पहुंचते ही उच्च हिमालय नंदा के जयकारों से गूंज उठा।

होमकुंड में नंदा बड़ी जात में शामिल मायके वालों ने अपनी छंतोलियों को पूजा अर्चना के लिए रखा। ससुराल क्षेत्र की भोज पत्र की छंतोलियां वापस लौटने का विधान है। वेद मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ का आयोजन किया गया। पुजारियों ने पूजा अर्चना की। नंदा बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह तथा कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला समेत तमाम तीर्थ यात्रियों तथा छंतोलियों संग गए गणो ने यज्ञ में भाग लिया। होमकुंड में ही चार सिंग्ये खाडू, नंदा देवडोलियों तथा अन्य देवी देवताओं की पूजा अर्चना की गई। चैसिंग्या खाडू को कैलास के लिए विदा किया गया। विदाई के इस मौके पर यात्रा में शामिल लोगों की आखें छलछला उठी।

इस दौरान मेरी मैत की ध्याणी तेरू बाटू हेरदू रोलू, जा मेरी गौरा जा तू शिव का कैलाश, जा मेरी गौरा तू, चैखम्भा उकाली.. जैसे गीतों के साथ अपनी ध्याण को विदा करते समय श्रद्धालुओं की आंखे छलछला उठी। इस दौरान श्रद्धालुओं नें अपने साथ लाये खाजा-चूडा, बिंदी, चूडी, ककड़ी, मुंगरी भी समौण के रूप में माँ नंदा को अर्पित किए। खाडू को मां नंदा भगवती के जेवर, भेंट, उपहार आदि सजाकर दिए जाने की परंपरा का निर्वहन किया गया। द्यो सिंह व भो सिंह देवताओं द्वारा जौलधारा से पूजा के लिए कलशो पर पानी लाकर लोगों को सुफल दिया। होमकुंड में इस तरह बड़ी जात यात्रा का समापन हो गया है। रहस्य व रोमांच की इस यात्रा में शामिल कुरूड़ से चली दशोली तथा बंड की देवडोलियां भी वापस लौटने लगी हैं।रहस्य व रोमांच की इस अद्भुत यात्रा के पूरा होने के बाद चैसिंग्ये खाडू के कैलास जाने के बाद जब यात्रा में शामिल लोग वापस लौटने लगे वे कैलास को निहारते रहे। रविवार को वापसी में निर्जन पड़ाव का यह चैथा दिन है। इस दौरान नंदा भक्त खुले आसमान के नीचे रातें गुजारते रहे। वापसी में चंदनियांघट/जामुन डाली नंदा भक्त पहुंचे तो वे यात्रा से लौटकर थकान भी महसूस करने लगे। चंदनियांघट को मां नंदा के गण चंदनियां का पवित्र स्थल माना जाता है। इस तरह सोमवार को नंदा भक्त सुतोल गांव पहुंच जाएंगे। सुतोल वापसी के दौरान देवदार तथा सुरई के घनघोर जंगल का दीदार करने का मौका भी नंदा भक्तो को मिलेगा। रास्ते में तातड़ा में द्यो सिंह मंदिर के दर्शनों का पुण्य लाभ भी मिलेगा। पहले से ही रूप गंगा-नंदाकिनी संगम के दाहिनी ओर बसे सुतोल गांव के लोग सभी नंदा भक्तों के आगवानी करते है। मां नंदा के पुजारी सभी भक्तों को प्रसाद व सुफल प्रदान करते हैं। सुतोल से यह यात्रा सड़क मार्ग से नंदानगर-कुरूड़ को जाएगी।

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