22 साल की पत्नी को दरांती से काटने वाले पति का सामाजिक बहिष्कार,मदद करने वाले पर लगेगा 5 लाख का जुर्माना।
कालसी (देहरादून):-13 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड के जौनसार-बावर जनजातीय क्षेत्र में अपनी 22 वर्षीय पत्नी की दरांती से गला काटकर निर्मम हत्या करने वाले आरोपी पति के खिलाफ समाज ने बेहद ऐतिहासिक और सख्त रुख अपनाया है। कालसी ब्लॉक के कचटा गांव में हुई इस जघन्य वारदात से आक्रोशित खतपट्टी कोरू के 17 गांवों के ग्रामीणों ने महापंचायत कर हत्यारे पति का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार कर दिया है। इसके साथ ही पंचायत ने फरमान जारी किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति या रिश्तेदार कानूनी रूप से आरोपी की मदद करेगा, तो उस पर 5 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और उसे भी समाज से बेदखल कर दिया जाएगा।
क्या थी पूरी घटना?
बीती 8 अक्टूबर को कालसी ब्लॉक के कचटा गांव में 24 वर्षीय मनोज ने आपसी विवाद के बाद अपनी 22 वर्षीय पत्नी नीलू उर्फ नीलम की धारदार हथियार (दरांती) से गर्दन पर वार कर बेरहमी से हत्या कर दी थी। दोनों की शादी महज तीन साल पहले हुई थी। वारदात को अंजाम देकर आरोपी मौके से फरार हो गया था, लेकिन अगले ही दिन ग्रामीणों ने उसे गांव के पास एक छानी (पशु आश्रय) से दबोचकर राजस्व पुलिस के हवाले कर दिया था, जहां से कोर्ट के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया।
महापंचायत का ऐतिहासिक फैसला और 5 लाख रुपये का जुर्माना।
इस क्रूर हत्याकांड के विरोध में सोमवार को खतपट्टी कोरू के सदर स्याणा (पारंपरिक मुखिया) सुनील दत्त जोशी की अध्यक्षता में एक खुली बैठक आयोजित हुई। बैठक में 17 गांवों के प्रतिनिधियों और आरोपी के परिवार ने सर्वसम्मति से कड़े निर्णय लिए जिसमे हत्यारे मनोज की कानूनी लड़ाई, गवाही या जमानत में परिवार का कोई भी सदस्य या रिश्तेदार सहयोग नहीं करेगा। यदि खत का कोई भी नागरिक, आरोपी के परिवार की ब्याही हुई बेटियां या अन्य रिश्तेदार कोर्ट-कचहरी के मामले में उसकी मदद करते हैं, तो उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें खत से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। यदि भविष्य में आरोपी कानून की किसी कमी या पैरवी के कारण जेल से छूट भी जाता है, तब भी वह कभी अपने परिवार, गांव और खत (क्षेत्र) की सीमा में कदम नहीं रख पाएगा।
सदर स्याणा सुनील दत्त जोशी ने बताया कि,महापंचायत ने कानून और सरकार से इस जघन्य अपराध के लिए दोषी को सख्त से सख्त (फांसी की) सजा देने की पुरजोर अपील की है। कचटा गांव की यह घटना बेहद दर्दनाक और पहाड़ी समाज को शर्मसार करने वाली है। हम पहाड़ के शांतिप्रिय लोग हैं और हमारे समाज में महिलाओं का स्थान सर्वोपरि है। आगे कोई ऐसी हिम्मत न कर सके, इसलिए हमने आरोपी का हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार किया है। हिंसक प्रवृत्तियों के लिए हमारे समाज में कोई जगह नहीं है।
जानिए क्या होती है ‘खतपट्टी’ और ‘स्याणा’ व्यवस्था?
उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित जौनसार-बावर एक जनजातीय क्षेत्र है, जो अपनी अनूठी सांस्कृतिक और पारंपरिक न्याय प्रणाली के लिए जाना जाता है।जौनसार-बावर पारंपरिक रूप से राजस्व और प्रशासनिक इकाइयों में बंटा है, जिन्हें ‘खतपट्टी’ कहा जाता है। पूरे क्षेत्र में कुल 39 खत पट्टियां हैं, जिनके अंतर्गत 358 राजस्व गांव आते हैं। ‘कचटा’ गांव भी इसी ‘खतपट्टी कोरू’ का हिस्सा है, जिसमें कुल 17 गांव शामिल हैं। इस समाज में किसी भी बड़े विवाद, अपराध या सामाजिक मुद्दे को सुलझाने के लिए खत के मुख्य राजा या मुखिया को ‘सदर स्याणा’ कहा जाता है। स्याणा के आदेश पर चौकीदार द्वारा सभी गांवों में सूचना भिजवाई जाती है, जिसके बाद सामूहिक चर्चा कर सर्वसम्मति से अंतिम फैसला लिया जाता है, जिसे पूरा समाज कानून की तरह मानता है।
