हाईकोर्ट में गुहार,7 हजार पेड़ नहीं, दून घाटी की सांसें दांव पर हैं मिलार्ड।
नैनीताल-24 जुलाई 2026
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून के यमुना वैली, दून घाटी में आसारोडी- झाझरा से प्रस्तावित सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में लगभग 7 हजार पेडों के कटान से पर्यावरण, वन्यजीवों सहित प्राकृतिक जलस्रोतों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव संबंधी जनहित याचिका में केंद्र और उत्तराखंड सरकार से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने और याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में उसका प्रतिउत्तर देने को कहा है। मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद रखी है।
मामले के अनुसार, देहरादून की समाजसेवी रेनू पाल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा कि यमुनावैली, दून घाटी में आशारोडी व झाझरा के बीच चल रहे ग्रीन प्रोजेक्ट में सड़क निर्माण के लिए लगभग सात हजार पेडों का कटान नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया(एन.एच.ए.आई.)द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। याचिका में कहा गया कि ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत गतिमान सड़क निर्माण से पहले उत्तराखंड बायो डायवर्सिटी बोर्ड से कोई अनुमति नहीं ली। कहा गया की बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान से पर्यावरण के साथ ही वन्यजीवों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा, क्योंकि इन जंगलों में पक्षीयों की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं और हाथियों का बफरजोन होने के साथ ही आसन बैराज है। क्षेत्र में हर वर्ष कई देशों से विभिन्न प्रजाति के पक्षी आते हैं। इसके निर्माण से पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ेगा। जिस पर खंडपीठ ने केंद्र सरकार सहित उत्तराखंड सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। साथ ही याचिकाकर्ता को उसका प्रति उत्तर दो सप्ताह में पेश करने को कहा है।
