पौड़ी में प्रसव के दौरान नवजात और मां की मौत,निजी अस्पताल पर लापरवाही के आरोप,जांच के लिए एनएचएम टीम गठित।
पौड़ी गढ़वाल:-30 जुलाई 2026
उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले से एक दुखद खबर सामने आ रही है जहां निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान हुए दर्दनाक घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई, जबकि गंभीर हालत में हायर सेंटर रेफर की गई प्रसूता ने जौलीग्रांट अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने जांच के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की टीम गठित कर दी है।
मृतका रेनु थपलियाल लिंगवाल के पति रजनीश लिंगवाल ने बताया कि उनकी पत्नी की संभावित प्रसव तिथि 31 जुलाई निर्धारित थी। 27 जुलाई को नियमित जांच के लिए वह पत्नी को जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। जांच के बाद अस्पताल प्रशासन ने उन्हें भर्ती कर लिया। परिजनों के अनुसार, 28 जुलाई को अस्पताल की ओर से ऑपरेशन की आवश्यकता बताई गई। कुछ समय बाद परिवार को बताया गया कि नवजात शिशु को बचाया नहीं जा सका.रजनीश लिंगवाल का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उनकी पत्नी की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। अस्पताल प्रशासन ने उन्हें पहले एम्स ऋषिकेश रेफर करने की बात कही, लेकिन बाद में अस्पताल कर्मी उन्हें जौलीग्रांट अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां उपचार के दौरान रेनु थपलियाल ने भी दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
मृतका के पति का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में रक्त (ब्लड) उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ की भी कमी थी, जिसके कारण समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रसव पीड़ा शुरू होने से पहले ही अस्पताल प्रशासन ने उनकी पत्नी को भर्ती करने का दबाव बनाया था। उनका कहना है कि यदि समय पर समुचित उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जातीं तो मां और नवजात दोनों की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर संबंधित चिकित्सक का लाइसेंस निरस्त करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामले पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जे.पी. चमोला और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनु भारती ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मरीज और नवजात को बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम ने हरसंभव प्रयास किए। डॉ. अनु भारती के अनुसार, 27 जुलाई की शाम प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला अस्पताल पहुंची थी। जांच के दौरान पाया गया कि बच्चेदानी बाहर की ओर निकली हुई थी और शिशु की धड़कन लगातार कम हो रही थी। स्थिति को देखते हुए तत्काल सीजेरियन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान बच्चेदानी को गंभीर क्षति पहुंची हुई मिली, जिसकी मरम्मत की गई। हालांकि नवजात को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने बताया कि प्रसूता को रक्त चढ़ाने के बाद आईसीयू सुविधा से लैस वाहन के माध्यम से हायर सेंटर रेफर किया गया, लेकिन गंभीर प्रसूति जटिलताओं (Obstetric Complications) के कारण उपचार के दौरान उनकी भी मृत्यु हो गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.एम. शुक्ला ने बताया कि निजी अस्पताल में प्रसूता और नवजात की मृत्यु का मामला संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच के लिए एनएचएम की टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाने में जुटा है कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की जिम्मेदारी और कार्रवाई तय होगी।
