बैरिकेडिंग के पार आंदोलन, इस पार खाकी:गैरसैंण में टकराव के बीच जीती इंसानियत,घायल प्रदर्शनकारियों और जवानों का पुलिस ने किया उपचार।

बैरिकेडिंग के पार आंदोलन, इस पार खाकी:गैरसैंण में टकराव के बीच जीती इंसानियत,घायल प्रदर्शनकारियों और जवानों का पुलिस ने किया उपचार।

भराड़ीसैंण (गैरसैंण):- 27 अक्टूबर 2026
रिपोर्ट-पुष्कर सिंह रावत

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने यह साबित कर दिया कि विचारों का मतभेद और आंदोलन अपनी जगह है,लेकिन इंसानियत का रिश्ता हर चीज से ऊपर है। विधानसभा घेराव के दौरान जहां एक तरफ भारी हंगामा, तीखी झड़पें और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त खींचतान देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ बैरिकेडिंग के दोनों ओर मानवीय संवेदनशीलता की एक अनूठी मिसाल भी दर्ज की गई।

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों और व्यवस्था संभाल रही पुलिस के बीच आज दिवालीखाल और जंगलचट्टी बैरियरों पर भारी धक्का-मुक्की हुई.लोहे के भारी गेटों और कटीले तारों से बनी मजबूत बैरिकेडिंग को पार करने की जद्दोजहद में कई आंदोलनकारी अनियंत्रित होकर गिर गए। इस कड़े टकराव के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथ-पैरों और शरीर पर गंभीर चोटें आ गईं, जिससे वे दर्द से कराह उठे।

खाकी ने पेश की मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल

तनाव के ऐसे माहौल में जहां अमूमन लाठियां और टकराव ही सुर्खियां बनते हैं, वहां उत्तराखंड पुलिस के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए दिल छू लेने वाला कदम उठाया.पुलिसकर्मियों ने तत्काल मोर्चे से हटकर घायलों की मदद की। जवानों और अधिकारियों ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घायल प्रदर्शनकारियों को सहारा दिया, उन्हें पानी पिलाया और मौके पर ही प्राथमिक उपचार किट मंगाकर उनके घावों पर दवा लगाई व पट्टियां बांधी। पुलिस के इस संवेदनशील रूप को देखकर मौके पर मौजूद हर शख्स ने खाकी की प्रशंसा की।

वर्दी के पीछे भी धड़कता है एक दिल

इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में विरोध करना जनता का अधिकार है और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस का कर्तव्य। लेकिन इस कर्तव्य को निभाने के दौरान जब चोटें आती हैं, तो दर्द दोनों पक्षों को बराबर होता है। आज की शांति व्यवस्था संभालने के दौरान पुलिस के भी कई अधिकारियों और जवानों को चोटें आयीं। यह घटना याद दिलाती है कि एक कड़क वर्दी के पीछे भी एक आम इंसान होता है, उसका अपना एक परिवार होता है और एक संवेदनशील दिल होता है जो दूसरों के दर्द को महसूस करता है।

गैरसैंण की बर्फीली हवाओं के बीच आज की यह तस्वीर यह बताने के लिए काफी थी कि जब समाज में विचारों की कड़वाहट बढ़ती है, तब इंसानियत और अपनों के प्रति संवेदना ही सबसे बड़ा मरहम बनती है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के फर्ज और हक का सम्मान करते हुए इस मर्मस्पर्शी पल को साझा किया।

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