मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में धोखे से बेची गयी 20 नाली जमीन के मालिक काट रहे तहसील के चक्कर।
ठोस कार्रवाई के बदले पिडित को मिल रही तारीख पर तारीख।
पिडित परिवार का बेटा 2 माह से नौकरी छोड लिख रहा शिकायती चिठ्ठियां।
भराडीसैंण (गैरसैंण)- 18 अगस्त 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.
भूमि की खरीद बिक्री को लेकर जहां सरकार सख्त कानून के दायरे में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश जारी करती रहती है, वहीं संबधित राजस्व विभाग के अधिकारीयों के ढीले-ढाले रवैये के चलते जमीनी स्तर पर स्थिति इसके एकदम उलट है।
ऐसा ही एक वाक्या ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के विधानसभा परिसर भराडीसैंण से सटे मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में पिछले पांच माह से देखने को मिल रहा है।जहां एक युवा अपनी पुस्तैनी जमीन को बचाने के लिए अपनी प्राइवेट नौकरी को छोड़, तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर है।वहीं, मामले में तहसील प्रशासन शिकायतकर्ता को न्याय देने के बदले तारीख पर तारीख दिए जा रहा है।
मामले में पीड़ित सुरेंद्र सिंह पुत्र मदन सिंह निवासी सारकोट द्वारा गैरसैंण पंहुचे गढ़वाल कमिश्नर को भी पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। जबकि इससे पूर्व तहसील कार्यालय सहित क्षेत्रीय विधायक को भी शिकायती पत्र दिया गया। शिकायत पत्र के अनुसार गांव के ही व्यक्ति द्वारा इसी साल 13 मई को उनकी कुल लगभग 20 नाली पैत्रिक भूमि को गलत तरीके से बेचा गया था, तब मामले की भनक लगते ही उनके पिता मदन सिंह पुत्र मकड सिंह द्वारा इसकी शिकायत जमीन की रजिस्ट्री से पहले ,6 अप्रैल को ही तहसील गैरसैंण में दर्ज करवा दी थी। इसके बावजूद जमीन को गलत तरीके से बेच दिया गया।
उल्लेखनीय है की मई माह में सारकोट गांव के जूनियर हाईस्कूल के नजदीक कुल 50 नाली भूमि बेचे जाने का मामला प्रकाश में आया था,जिसमें से 15 नाली भूमि की रजिस्ट्री एनजीओ के नाम होने के चलते निरस्त कर दी गयी थी। सुरेंद्र के अनुसार बेची गयी कुल 35 नाली भूमि में से एक जमीन बेचने वाले हरि सिंह पुत्र सिताब सिंह का वर्तमान में उक्त भूमि पर कोई भी कब्जा न होने के बावजूद,उनके पिता के हिस्से की लगभग 20 नाली भूमि बेच दी गयी।
खाता खतौनी संख्या 0093 में खसरा नंबर 663 ,671 व 672 उनके पिता महेंद्र सिंह के नाम पर दर्ज है,जो लगभग 12 नाली भूमि है,वहीं खसरा नंबर 664 व 668 की 8 नाली जमीन भी उन्हीं के कब्जे में है,उसे भी बेच दिया गया है। भूमि विक्रय पूरी तरह से गैर कानूनी है,जिसमें भूमि बिक्री कानून का पालन नहीं किया गया है। गौरतलब है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम व उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था कानून के अनुसार संयुक्त खाते में सभी सह खाताधारकों की रजा मंदी जरूरी होती है। मामले में उक्त खाते मे शामिल 14 खाताधारकों की भी रजामंदी नहीं ली गयी।
मामले में 13 जुलाई 2026 को तहसीलदार को लिखित शिकायत के बाद 23 जुलाई को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया था,लेकिन उक्त तारीख पर तहसीलदार के अन्यत्र रहने से सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद पीड़ित परिवार 7 अगस्त को भी सुनवाई की उम्मीद में तहसील पहुंचा, लेकिन फिर भी सुनवाई नहीं हुई।मामले में जिलाधिकारी चमोली द्वारा अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जून माह में एक जांच समिति का गठन भी किया गया था,जिसकी रिपोर्ट अभी तक पीड़ित परिवार को नहीं दी गयी है। वहीं, पिड़ित परिवार तहसीलदार द्वारा 1 जुलाई 2026 को की गई जांच रिपोर्ट मांग रहा है, जिसे डेढ माह बाद भी शिकायतकर्ता को नहीं दिया जा रहा है।
सुरेंद्र सिंह ने बताया कि दाखिल खारिज की प्रक्रिया के तहत तहसील द्वारा भेजे गये इश्तिहार में हरि सिंह पुत्र सिताब सिंह व महेंद्र सिंह पुत्र अषाड सिंह दो अलग-अलग व्यक्तियों को एक ही नाम हरि महेंद्र पुत्र अषाड सिंह दर्शाया जाना भी सरासर गलत है। लेकिन तहसील प्रशासन न तो उनकी सुन रहा है न कोई जबाब दे रहा है।
उल्लेखनीय है कि उक्त 35 नाली भूमि रवि चौहान पुत्र कुलदीप चौहान निवासी अल्मोड़ा व हरि सिंह पुत्र नैन सिंह निवासी बागेश्वर द्वारा खरीदी गई है।खरीददारी में भू कानून के तय मानकों का पालन हुआ या नहीं इसका खुलासा भी जिला प्रशासन ढाई माह बाद भी नहीं कर पाया है। मामले को लेकर तहसीलदार हरीश पांडे ने बताया की जल्द ही सभी पक्षों को बुलाकर तय नियमों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। जमीन की गलत रजिस्ट्री पाये जाने पर निरस्त करने की कार्यवाही की जाएगी।
