कांग्रेस के सामने 19 सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की चुनौती

कांग्रेस के सामने 19 सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की चुनौती

गोपेश्वर:-09 अगस्त 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सत्ता में काबिज होने की जद्दोजहद में जुटी कांग्रेस के सामने अब 19 सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की चुनौती आ खड़ी हो गई है। इसके चलते दूसरी पांत के नेताओं को एडजस्ट करने के लिए कांग्रेस के रणनीतिकारों को खासा पसीना बहाना पड़ेगा।

दरअसल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने तत्कालीन कांग्रेस दिग्गजों को मैदान में उतारा था। इसके चलते 20 सीटों पर चुनाव हार चुके कांग्रेस नेताओं ने इसके बाद अन्य दलों में अपना भविष्य तलाशना शुरू किया। इसी रणनीति के तहत तमाम चुनाव लड़े नेता अब भाजपा अथवा अन्य दलों में शामिल हो गए है। अब जबकि 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं तो कांग्रेस को 19 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन नए सिरे से करना होगा। बदरीनाथ सीट पर कांग्रेस ने 2022 में राजेंद्र सिंह भंडारी को चुनाव मैदान में उतारा था।

गढ़वाल संसदीय सीट के अंतर्गत एक मात्र बदरीनाथ सीट कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में भंडारी ही जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। इस बीच यकायक 2024 में भंडारी कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए.2024 में ही उप चुनाव हुआ तो कांग्रेस ने लखपत बुटोला पर दांव खेला और वह भाजपा प्रत्याशी भंडारी को पराजित कर विधानसभा में पहुंच गए। इस तरह बदरीनाथ सीट पर कांग्रेस के सामने नए उम्मीदवार तलाशने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि कांग्रेस के ही अन्य दावेदार अपनी दावेदारी तो कर रहे हैं किंतु बुटोला की दावेदारी पक्की बनी हुई है। इस तरह 19 सीटों पर कांग्रेस को दूसरी पांत के दावेदारों का चयन करने की चुनौती आ खड़ी हो गई है।

2022 में कांग्रेस ने पुरोला से मालचंद,यमुनोत्री से दीपक विजल्वाण, गंगोत्री से विजयपाल सजवाण, धनोल्टी से जोत सिंह बिष्ट, पौड़ी से नवल किशोर, लैंसडाउन से अनुकृति गुंसाई रावत, चैबटाखाल से केशर सिंह नेगी, यमकेश्वर से शैलेंद्र रावत, खानपुर से सुभाष चैधरी, रूडकी से यशपाल राणा, कालाढुंगी से महेश शर्मा, रूद्रपुर से मीना शर्मा, भीमताल से दानसिंह भंडारी, बागेश्वर से रंजीत दास, धर्मपूर से दिनेश अग्रवाल को मैदान में उतारा था। इनमें अधिसंख्य उम्मीदवार भाजपा अथवा अन्य दलों में शामिल हो गए हैं। डोईवाला से कांग्रेस ने हीरा सिंह बिष्ट को मैदान मेें उतारा था। बिष्ट का हाल ही में निधन हो गया है। इस तरह कांग्रेस के सामने इन सीटों पर नए उम्मीदवारों का चयन करना किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। वैसे भी कांग्रेस दावेदारों की कोई कमी नहीं है। दूसरी पांत के नेता लगातार अपनी दावेदारी जता रहे हैं। कांग्रेस एक तरह से सत्ता में काबिज होने की जद्दोजहद में जुटी हुई है। ऐसे में प्रत्याशियों का चयन करना आसान काम भी नहीं है।

विधानसभा में कांग्रेस के 20 उम्मीदवार 2022 में जीते थे। कमोवेश मौजूदा कांग्रेस विधायकों की उम्मीदवारी 2027 के लिए तय मानी जा रही है,हालांकि भाजपा के आंतरिक सर्वे में 32 विधायकों के रिपोर्ट नेगेटिव आई है। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से सत्ता में आने की आश लगाए कांग्रेस को एक तरह से संजीवनी सी मिल गई है। कतिपय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अधिकतर मौजूदा विधायकों के बजाय भाजपा नए उम्मीदवार मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर सकती है। इससे एंटीइनकैबेंसी का खतरा भी टलेगा और नए नवेले उम्मीदवार से जीत की राह भी बनेगी। इस तरह की रणनीति के बीच कांग्रेस इस बार कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती है। वैसे कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत का दावा है कि इस बार कांग्रेस 40 से 45 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता में काबिज होगी। भाजपा भी इस दावे को लेकर अतिरिक्त सर्तकता बरत कर प्रत्याशियों का चयन करेगी। अब देखना यह है कि कांग्रेस 2022 के मुकाबले प्रत्याशियों से खाली सीटों पर दावेदारों का चयन किस तरह करती है इस पर ही उसकी अग्नि परीक्षा भी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!