बैशाखी पर “जै-जै मां पाथावार नंदा” का विडियो गीत रिलीज,गीतकार जगदीश ढौंडियाल द्वारा रचित गीत इंटरनेट मीडिया पर जमकर वायरल।
गैरसैंण की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पहचान को समर्पित है गीत,गंगामाई ,भैरवगढी ,भराडीदेवी व बिंसर मंदिरों के मनोरम दृश्य।
गैरसैंण-14 अप्रैल 2026
रिपोर्ट-प्रेम संगेला.
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के धार्मिक और आध्यात्मिक संस्कृति को एक सूत्र में पिरौए हुए मां पाथावार नंदा म्यूजिक गुर्प द्वारा ” जै-जै मां पाथावार नंदा ” गीत का बैसाखी के शुभ अवसर पर विमोचन कर रिलीज किया गया ।
शिक्षक जगदीश प्रसाद ढौंडियाल द्वारा रचित गीत को शिवम पंवार ,नेहा मढवाल ,कविता पंवार व प्रिया पुंडीर ने अपने सुरों से सजाया है।
गीत के बोल “जै-जै पाथावार नंदा, गैरसैंण गैड गौं की गंगा ” “लोहवा गढी में भैरव भगवान , शिव जी का धरिया मां तेरो दरबान ” के मंगलवार को रिलीज होते ही अपनी बेहतर धुन ओर मनमोहक दृश्यों के चलते इंटरनेट मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। फनियाल स्टूडियो में रिकार्ड किया गया यह गीत बैसाखी के अवसर पर शंखनाद ग्रुप के अध्यक्ष पंकज गैड़ी व संरक्षक प्रवक्ता सुरेंद्र नेगी व प्रेम सिंह रावत द्वारा रिलीज किया गया।
गैरसैंण के विभिन्न धार्मिक स्थलों की मनमोहन नजारों की रिकॉर्डिंग राकेश फनियाल व वीडियो मिक्सिंग शिवम पंवार द्वारा की गई है.विडियो गीत में गैरसैंण गंगा माई मंदिर में आयोजित होने वाले नंदा अष्टमी पाती मेले के मनोहारी दृश्य फिल्माए गए हैं,वहीं ऊंची चोटियों पर स्थित भैरवगढी मंदिर के मनमोहक नजारे भी देखने को मिल रहे हैं। वीडियो गीत में विधानसभा परिसर भराडीसैंण के निकट स्थित मां भराड़ी देवी मंदिर के आकर्षक दृश्यों के साथ ही दुधातोली पर्वत श्रृंखलाओं के घने देवदार के वृक्षों से घिरे बाबा बिंसर महादेव का मंदिर भी दिखाई दे रहा है। वहीं, गैरसैंण के नजदीकी गांवों में शामिल कर सारकोट,परवाडी,फरकंडे,जागडी,सेरा,सलियाणा,गैड व धारगैड गांवों के खूबसूरत नजारों को भी समेटा गया है। गैरसैंण क्षेत्र से निकलने वाली रामगंगा व सहायक नदियों के साथ ही सीढीनुमा खेत खलिहान,ऊंची चोटियों ओर घाटियों को भी बड़ी खूबसूरती के साथ वीडियो गीत में समाहित किया गया है।
गीतकार जगदीश ढोंडियाल ने गीत के माध्यम से अपनी बहुआयामी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उल्लेखनीय है कि राजकीय इंटर कॉलेज मरोड़ा में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत जगदीश ढोंडियाल बेहतरीन किक्रेट कमेंटेटर होने के साथ ही वेदों का भी ज्ञान रखते हैं.उन्होंने वेदव्यास के रूप में में भी अपनी पहचान बनायी है। गीत की रचना को लेकर उन्होंने कहा की आधुनिकता की दौड़ के साथ हमारी अध्यात्मिक और धार्मिक संस्कृति भी आगे बढ़ती रहे, जिसके लिए गीत-संगीत एक बेहतर माध्यम बन सकता है।
➡️सम्पूर्ण गीत⤵️
जै जै मां पाथावार नंदा
गैरसैंण गैड गौं की गंगा,
लोबागढ़ी में भैरव भगवान
शिव जी का धरियां मां तेरो दरबान,
चौरासी गौं चोदिशियों मां
जै जै मां पाथावार नंदा …..
दूधातोली में बाबा बिनसर
तेरी दया दृष्टि लोबा खंसर
तेरा भगत घर-घर मां
जै जै मां पाथावार नंदा…….
ऊंची दिशा में ,तेरी बैणी भराडी
त्यारा भगत मां सारकोट परवाड़ी
त्वैंथे चढौला मां चूड़ी ओर साडी
जै जै मां पाथावार नंदा ……
भादो का मैना माता मैत बुलियोला
हित घनडियाल लाटू साथ भेजोला
नंदा की ठोकी में मां तै पूजियोला
जै जै मां पाथावार नंदा
गैरसैंण गैड गौं की गंगा ।
