शिलासमुद्र के प्रवास पर पहुंची मां नंदा की बड़ी जात यात्रा।
देवाल (चमोली):-19 सितंबर 2026
रिपोर्ट-रजपाल बिष्ट.
नंदा की बड़ी जात शनिवार को उच्च हिमालय में स्थित शिलासमुद्र के प्रवास पर पहुंच गई है। रविवार को नंदा जात यात्रा होमकुंड पहुंचकर मां नंदा की पूजा अर्चना के साथ मां नंदा और चैसिंग्या खाडू को विदा कर वापसी पड़ावों को लौट आएगी।
हिमालय की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा की बड़ी जात अपने अंतिम रात्रि पड़ाव शिला समुद्र पहुंच गई है। इसके तहत पातरनचैणिया से छेड़ी नाग, रूपकुंड, ज्यूंरागली की दुरूह चढ़ाई, थाला उलारी होते हुए रात्रि विश्राम के लिए बड़ी जात के अंतिम पड़ाव शिला समुद्र पहुँची तो यात्रा में चल रहे श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली। शिलासमुद्र में मां नंदा और बंड भूमियाल के जयकारों से पूरा कैलाश नंदामय हो गया। इससे पूर्व नंदा भक्तों को दुरूह,पथरीले रास्ते और हांफती चढ़ाई को पार करना पड़ा। पूरे रास्ते ने श्रद्धालुओं की अग्नि परीक्षा ली, फिर भी विपरीत परिस्थितियां नंदाभक्तों का हौंसला नहीं डिगा पाई।
शिलासमुद्र 4,210 मीटर (14,600 फीट) की ऊंचाई पर स्थित एक अत्यंत दुर्गम और रहस्यमयी उच्च हिमालयी पड़ाव है। यहाँ चारों तरफ केवल बड़े-बड़े और टूटे हुए पत्थरों (शिलाओं) का विशाल भंडार समुद्र जैसा प्रतीत होता है। इसलिए इसका नाम शिलासमुद्र पड़ा। शिलासमुद्र में जहां नजर दौडाओ वहां शिलाएं ही शिलाएं दिखाई देती हैं।
होमकुंड में रविवार को मां नंदा व चैसिंग्या खाडू की विदाई।
रविवार को प्रातः पूजा अर्चना के पश्चात नंदा बड़ी जात यात्रा शिलासमुद्र से रवाना होकर होमकुंड पहंुचेगी। होमकुंड में पूजा अर्चना के पश्चात नंदा की कैलास विदाई होगी। इसी दौरान चैसिंग्या खाडू को भी कैलास के लिए विदा कर दिया जाएगा। इसके पश्चात नंदा जात के यात्री और देवडोलियां सुतोल के लिए वापसी करेंगी।
ज्यूंरागली में भावुक हुई मां नंदा।
मां नंदा की बड़ी जात में जैसे ही नंदा की डोली रूपकुंड से ज्यूंरागली पहुंची तो मां नंदा भावुक हुई। उन्होंने बंड भूमियाल के प्रति स्नेह जताया। 4 बार की बड़ी जात में शामिल बंड मंदिर समिति के संरक्षक शंभू प्रसाद ने बताया कि यह उनकी चैथी बड़ी जात यात्रा है। इससे पहले वे 3 बार बड़ी जात कर चुके हैं। बताया कि मान्यता है कि मां नंदा को कैलाश जाने के लिए जब रूपकुंड से आगे ज्यूंरागली नामक स्थान से आगे जाने का कोई रास्ता नहीं मिल पाता था तो सभी देवी देवता ज्यूंरागली से आगे जाने में असमर्थ हो जाते हैं। तब बंड भूमियाल ने अपने अस्त्र कटार से ज्यूंरागली में आगे जाने का रास्ता बनाया। तब जाकर ही माँ नंदा वहां से आगे ताला उलारी, शिलासमुद्र और होमकुंड को प्रस्थान कर पाई। मान्यता है कि ज्यूंरागली में सभी देवताओं को कर के रूप में कुछ न कुछ देना पड़ता था। इसके बावजूद बंड भूमियाल को कोई भी कर नहीं देना पड़ता था।
मां राजराजेश्वरी ल्वाणी गांव प्रवास पर।
बधाण की मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली ल्वाणी गांव के प्रवास पर पहुंच गई है। लोकजात यात्रा के तहत बेदनी कुंड तक गई राजराजेश्वरी मां नंदा की डोली बांक गांव में पूजा अर्चना के पश्चात अगले पड़ाव को रवाना हुई। इसके तहत बगड़ीगाड़ होते हुए देव डोली रात्रि प्रवास को ल्वाणी गांव पहुंच गई है। देव डोली की वापसी पर तमाम भक्तों ने पुष्प वर्षा के साथ आगवानी की।
रविवार को देव डोली ल्वाणी गांव में पूजा अर्चना के पश्चात रात्रि प्रवास को उलंग्रा गांव को रवाना होगी। इसके तहत तमाम पड़ावों के लोग देव डोली का स्वागत सत्कार करेंगे।
