12 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री करेंगे लोकार्पण।
दिल्ली के गांधी नगर में भी तैयारियां शुरू,दिल्ली की मुख्यमंत्री सहित विधयाक पीएम का भाषण देखेंगे लाइव।
देहरादून/दिल्ली-11 अप्रैल 2026
अब वो वक्त सिर्फ 48 घंटे दूर है, जब दिल्ली से देहरादून महज ढाई घंटे में पहुंचा जा सकेगा। इससे ईंधन के साथ ही समय की बचत होगी। 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे। 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण भले ही पीएम देहरादून से करेंगे लेकिन, तैयारियां दिल्ली के गांधी नगर में भी शुरू हो गई हैं। यहां पंडाल तैयार किया जा रहा है, जहां सीएम रेखा गुप्ता, दिल्ली सड़क परिवहन राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा, सासंद मनोज तिवारी व यमुनापार के विधायक पीएम का भाषण लाइव देखेंगे।
केंद्रीय राज्यमंत्री और पूर्वी दिल्ली से सांसद हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि पंडाल में एक हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इस एक्सप्रेसवे से यातायात सुगम होगा ही साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। वाहन चालकों को खजूरी, गांधी नगर, मंडोला, बागपत में लगने वाले जाम से भी निजात मिलेगी।
हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि देहरादून के राजाजी नेशनल पार्क में जानवर रहते हैं। यहां हाथी, हिरण, बाघ समेत कई जानवर हैं।एनएचएआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि जानवरों का जन जीवन भी प्रभावित न हो और एक्सप्रेसवे भी बन जाए। इंजीनियरों की टीम ने यहां का सर्वे किया। फैसला किया कि यहां ऐसा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाए, जिससे जानवर भी सुरक्षित रहें और वाहन चालक भी आवागमन कर लें। इस पार्क में नदी भी गुजरती है। नदी से कुछ ही दूरी पर एलिवेटेड रोड बनाया गया। पार्क व एलिवेटेड के बीच की दूरी इतनी रखी गई कि जानवर नीचे से आसानी से निकल सकें। एलिवेटेड रोड पर साउंड बैरियर लगाए गए हैं। ताकि वाहनों के शोर व लाइट से जानवर परेशान न हो।
एलिवेटेड तैयार होने के बाद पांच माह तक एनएचएआई ने इसके नीचे कैमरे लगाकर जानवरों की मॉनिटरिंग की, कई फोटो व वीडियो लिए गए। जानवरों के जनजीवन को देखा गया। देहरादून के पास 340 मीटर लंबी ढाटकाली सुरंग बनाई गई है।
कश्मीरी गेट व आनंद विहार बस अड्डा से दिल्ली से देहरादून, सहारनपुर के लिए रोडवेज व वोल्वो बस चलती हैं। एक्सप्रेसवे बनने से उम्मीद जताई जा रही है कि बसों का किराया इस रूट पर सस्ता होगा। क्योंकि दूरी कम होने के साथ ही समय की बचत हो रही है। उम्मीद है कि उद्धाटन के बाद उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश रोडवेज अपने रूट में परिवर्तन करके एक्सप्रेसवे से ले जा सकते हैं।
