3 हजार रूपये में जानलेवा डुबकी लगाने को मजबूर,5 हजार आबादी की प्यास बुझा रहे 3 चौकीदार।

3 हजार रूपये में जानलेवा डुबकी लगाने को मजबूर,5 हजार आबादी की प्यास बुझा रहे 3 चौकीदार।

विकासखंड गैरसैंण में एक भी सरकारी चौकीदार नहीं।

मेहलचौरी (गैरसैंण)- 19 अगस्त 2026
रिपोर्ट- प्रेम संगेला.

बरसात के मौसम में उफनते गधेरों,खड़ी चट्टानों ओर जंगली जानवरों के खौफ के बीच आमजन को पेयजल आपूर्ति सुचारू चलती रहे , इसके लिए जल संस्थान विभाग में अस्थाई तौर पर काम करने वाले चौकीदार महज 3 हजार रूपये मासिक मानदेय पर काम करने को मजबूर हैं।

मेहलचौरी क्षेत्र की 6 पेयजल योजनाओं पर तीन पीटीसी चौकीदारों को जल संस्थान द्वारा नियुक्त किया गया है, जिन्हें जान जोखिम में डालकर पेयजल आपूर्ति करने के बदले महीने भर का मेहनताना महज 3 हजार रूपये ही दिया जा रहा है। चल रहे चौमासे के मौसम में कहीं उफनते नाले तो कहीं फिसलन भरी पथरीली चट्टानों के बीच जंगली जानवरों का खौफ भी मंडराता रहता है। इन सबके बीच पेयजल आपूर्ति बहाल करने को 9 से 12 किलोमीटर तक का जोखिमभरा सफर करने वाले चौकीदारों को विभागीय स्तर पर ना तो कोई मेडिकल सुविधा देय होती है,ओर नाहीं विपरीत परिस्थितियों में किसी प्रकार की बीमा सुविधा। मेहलचौरी बाजार को पेयजल सप्लाई करने के लिए यहां से लगभग 9 किलोमीटर दूर झिरकोट गधेरे से 40 एमएम की दो लाइनें संचालित होती हैं ,साथ ही सरोवर गांव के लिए 25 एमएम की भी दो लाइनें ओर झिरकोट से 3 किलोमीटर ओर आगे सणकोट की ऊंची पहाड़ियों के जंगलों से रंगचौड़ा ,पाटली लाटूखाली ,गोगना , सिलंगा ,ऊजिटिया आदी गावों के लिए 50 एमएम की दो लाइनों को मिलाकर कुल छ योजनाओं का रखरखाव का जिम्मा तीन पीटीसी चौकीदारों के भरोसे चल रहा है। जिनमें श्याम सिंह पालीवाल ,दौलत सिंह बिष्ट व बच्चन सिंह नेगी शामिल हैं । भारी बरसात के मौसम में पेयजल आपूर्ति अक्सर ठप हो जाती है। तब कठिन रास्तों को पार कर पेयजल सप्लाई के लिए बने 5 से 6 फीट गहरे संग्रहण टैंक की सफाई के लिए जान जोखिम में डाल डुबकी भी लगानी पड़ती है।

वर्ष 2019 में सणकोट के जंगलों में ही पीटीसी चौकीदार धीरेंद्र मेहरा की पहाड़ी से गिरने के बाद पैर टूट गया था। लेकिन विभागीय स्तर पर मदद की कोई सीधी व्यवस्था न होने से परेशान चौकीदार ने तब कर्ज लेकर अपना इलाज करवाया था। उल्लेखनीय है की ब्लॉक गैरसैंण की जल संस्थान द्वारा संचालित 38 योजनाओं पर 42 पीटीसी चौकीदार वर्तमान में काम कर रहे हैं। वहीं पेयजल निर्माण निगम की फिलहाल 5 योजनाओं पर 3 चौकीदार काम कर रहे हैं। पानी के बिलों से करोडों रूपये राजस्व संग्रहण करने वाले
दोनों विभागों में वर्तमान में कोई भी सरकारी चौकीदार नियुक्त नहीं है। जिससे सारी व्यवस्था 3 हजार मासिक पाने वाले पीटीसी चौकीदारों के भरोसे ही चल रही है। जान जोखिम में डाल काम करने वाले चौकीदारों ने न्यूनतम मानदेय 10 हजार मासिक किए जाने के साथ ही विभाग द्वारा चोटिल होने की स्थिति में स्वास्थ्य सुविधा व बीमा सुविधा का लाभ भी दिया जाना चाहिए की मांग की है।

मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य कोठा सुरेश बिष्ट,प्रधान रंगचौणा मनोज नेगी, गोगना के अमरदीप, सिलंगा की दीपा देवी व मेहलचौरी की रेनू देवी ने कहा की जान जोखिम में डाल जनसेवा कर रहे पीटीसी चौकीदारों का मानदेय बढाने के साथ ही मेडिकल व बीमा सुविधा दिये जाने की मांग लंबे समय से सरकार से की जा रही है, जिस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है ।

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