10 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्राम प्रधानों का हल्लाबोल,सचिवालय कूच के दौरान पुलिस से तीखी झड़प।
देहरादून, 08 अक्टूबर 2026
अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तराखंड के कोने-कोने से राजधानी देहरादून पहुंचे ग्राम प्रधानों ने आज सरकार के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। प्रदेश भर से आए सैकड़ों ग्राम प्रधानों ने सचिवालय कूच कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।
रणनीति के तहत सुबह से ही भारी संख्या में ग्राम प्रधान देहरादून के परेड ग्राउंड में एकत्रित होना शुरू हुए। वहां एक जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने सरकार की नीतियों पर जमकर आक्रोश व्यक्त किया। सभा के बाद सभी ग्राम प्रधान एक विशाल जुलूस की शक्ल में सचिवालय का घेराव करने के लिए निकले।
प्रदर्शनकारियों के तेवर भांपते हुए पुलिस ने सचिवालय से काफी पहले भारी बैरिकेडिंग लगा रखी थी। जैसे ही जुलूस वहां पहुंचा,आक्रोशित प्रधानों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को जबरन तोड़ दिया और आगे बढ़ने लगे। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस प्रशासन ने कड़ी मशक्कत और अतिरिक्त बल के प्रयोग से प्रदर्शनकारियों को सचिवालय की तरफ बढ़ने से रोका। पुलिस द्वारा रोके जाने से नाराज ग्राम प्रधान वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
अल्मोड़ा के सल्ट से आंदोलन में शामिल होने पहुंचे ग्राम प्रधान अमित रावत ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने उस गांव की मिट्टी के पहरेदारों (ग्राम प्रधानों) को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से राजनीति का रास्ता निकलता है। सरकार ने योजनाओं के नाम और नियम तो बदल दिए, लेकिन जमीनी हकीकत को भूल गई।”
अमित रावत ने आगे बताया कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की भारी किल्लत है। ऐसे में डिजिटल या ऑनलाइन अटेंडेंस लगाने के चक्कर में ही श्रमिकों के 2 से 3 घंटे बर्बाद हो जा रहे हैं। नेटवर्क न होने से न तो समय पर काम हो पा रहा है और न ही ग्रामीणों को रोजगार मिल पा रहा है। इसीलिए भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ऑनलाइन हाजिरी के नियम को तुरंत बंद कर ऑफलाइन व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए।
प्रदर्शन कर रहे ग्राम प्रधानों ने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं:
1- मानदेय में वृद्धि: ग्राम प्रधानों को न्यूनतम ₹20,000 प्रति माह का मानदेय दिया जाए।
2- ऑफलाइन उपस्थिति: उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए श्रमिकों की उपस्थिति (वीबी जीरामजी/मनरेगा योजना के तहत) को पूरी तरह से ऑफलाइन किया जाए।
3- मजदूरी में बढ़ोतरी: अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी ₹600 प्रतिदिन और कुशल श्रमिकों की मजदूरी न्यूनतम ₹800 प्रतिदिन तय की जाए।
