उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ले रही है कई फैंसले।
देहरादून-27 दिसम्बर 2025
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने कई बड़े फैसले लिए है.आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान योजना के तहत आम जनता को मिलने वाली निशुल्क इलाज सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी, लेकिन अब इन योजनाओं को पूरी तरह इंश्योरेंस मोड में संचालित किया जाएगा.इसका सीधा फायदा यह होगा कि सूचीबद्ध अस्पतालों को इलाज के भुगतान में हो रही देरी खत्म होगी और भुगतान समय पर हो सकेगा।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के मुताबिक, आयुष्मान और अटल आयुष्मान योजना में इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि भुगतान की प्रक्रिया इंश्योरेंस कंपनी और थर्ड पार्टी एजेंसी के जरिए होगी.वहीं, गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड पर चलाने का निर्णय लिया गया है, इसके तहत 5 लाख रुपये तक के क्लेम इंश्योरेंस के माध्यम से और 5 लाख रुपये से अधिक के क्लेम ट्रस्ट मोड से निपटाए जाएंगे.बता दें कि गोल्डन कार्ड योजना के तहत इलाज का करीब 125 करोड़ रुपये का बकाया राज्य सरकार वहन करेगी. साथ ही, गोल्डन कार्ड धारक कर्मचारियों से लिए जाने वाले वार्षिक अंशदान में महंगाई को देखते हुए 250 से 450 रुपये तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है. पिछले पांच वर्षों से अंशदान में कोई वृद्धि नहीं की गई थी.इसके अलावा, कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा संशोधन नियमावली 2025 को मंजूरी मिल गई है, इसके तहत प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए आयु सीमा 50 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है.नए एनएमसी मानकों के अनुसार सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिए अलग-अलग विभागों का गठन भी किया गया है.हल्द्वानी स्थित स्वामी राम कैंसर अस्पताल में डायरेक्टर, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर समेत चार नए पदों का सृजन किया गया है
वहीं श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 277 संविदा, दैनिक वेतन और नियत वेतन कर्मचारियों को समान कार्य-समान वेतन का लाभ देने के मामले को कैबिनेट की उपसमिति को भेज दिया गया है.इसके साथ ही, दुर्गम और अति-दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टरों और क्लीनिकल सेवाओं से जुड़े चिकित्सकों को उनके वेतन मैट्रिक्स में 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता देने का निर्णय भी लिया गया है.कुल मिलाकर, राज्य सरकार के ये फैसले न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि अस्पतालों, डॉक्टरों और कर्मचारियों को भी राहत देने वाले साबित होंगे।
