कई किमी पैदल चलकर बुजुर्ग को पहुंचाया हॉस्पिटल,ग्रामीण डोली पर लादकर मरीज को ले गए अस्पताल।

कई किमी पैदल चलकर बुजुर्ग को पहुंचाया हॉस्पिटल,ग्रामीण डोली पर लादकर मरीज को ले गए अस्पताल।

बागेश्वर-07 फरवरी 2026

सरकार जहां सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी चीजों को हर गांव तक पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत ठीक इतर हैं। कई गांवों आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। जहां लोगों को आए दिन परेशानियों से जूझना पड़ता है. चुनाव के समय ग्रामीणों को जनप्रतिनिधि वादे तो खूब करते हैं, लेकिन जीतने के बाद गांव की ओर मुड़ कर भी नहीं देखते जिससे गांव की समस्याएं जस की तस बनी रहती है।

गौर हो कि बागेश्वर जिले के दूरस्थ गांव आज भी सड़क, स्वास्थ्य शिक्षा से महरूम है।हिरमोली गांव में सड़क न होने के कारण 72 वर्षीय सेवानिवृत्त कैप्टन आनंद बल्लभ जोशी को डोली के सहारे मुख्य मार्ग तक लाना पड़ा। इस गांव में वर्तमान में लगभग एक दर्जन परिवार निवास करते हैं, यह तस्वीर बताने के लिए काफी है कि आजादी के इतने दशकों बाद भी दुर्गम गांवों के लोग सड़क सुविधा से वंचित हैं और आज भी मरीजों को डोली से रोड तक पहुंचाना पड़ता है। हिरमोली के ग्रामीणों के परिजनों ने बताया को हल्द्वानी से गांव लौटे सेवानिवृत्त कैप्टन को अचानक तेज बुखार की शिकायत हुई. रात में तबीयत अधिक बिगड़ने पर परिजन चाहकर भी उन्हें अस्पताल नहीं ले जा सके।

गांव में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा ना होने के कारण आपातकालीन सेवा 108 से भी संपर्क नहीं हो पाया। सुबह गांव के ग्रामीण पूरन चंद्र जोशी, बसंत वल्लभ, प्रकाश चंद, हीरा सिंह, ललित सिंह और लाल सिंह सामुहिक रूप से डोली से साढे तीन किमी की दुर्गम चढ़ाई-ढलान और खतरनाक गदेरे को पार कर ग्रामीण किसी तरह उन्हें सड़क तक लाए, जहां से निजी वाहन से बागेश्वर जिला पहुंचाया गया। ग्रामीण हरगोविंद जोशी ने बताया कि कौलाग, गाजली और तुपेड़ मोटरमार्ग की मांग वर्षों से की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय इस सड़क की स्वीकृति की बात हुई थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही योजना फाइलों में दबकर रह गई। ग्रामीणों ने बताया यदि शीघ्र सड़क का निर्माण नहीं होता है तो उग्र आन्दोलन किया जाएगा।

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