गैरसैंण की आत्मा को मारने का काम कर रही भाजपा सरकार -हरीश रावत
मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में जमीनों की बिक्री का है मामला।
भराड़ीसैण (गैरसैंण):- 08 जून 2026
रिपोर्ट-प्रेम संगेला।
ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण गैरसैंण के विधानसभा भवन परिसर के नजदीकी गांवों में बड़ी मात्रा में जमीन बेचने का मामला तूल पकड़ने लगा है।
जिसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वर्तमान सरकार गैरसैंण में जमीनों के बिक्री की खुली छूट देकर गैरसैंण की आत्मा को मारने का काम कर रही है। उन्होंने कहा की गैरसैंण के महत्व को देखते हुए उनकी सरकार ने जमीन की खरीद फरोख्त पर रोक लगाई हुई थी ,जिसे हटाकर भाजपा सरकार ने भू माफियाओं के लिए गैरसैंण के दरवाजे खोल दिए हैं । उन्होंने कहा की सरकार को तत्काल भूमी की खरीद फरोख्त पर रोक लगानी चाहिए। जिससे भविष्य में गैरसैंण के योजनाबद्ध विकास के लिए जमीनें बच सके।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा परिसर से सटे मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में विगत मई माह में ही 50 नाली भूमि ग्रामीणों द्वारा बेचे जाने का मामला प्रकाश में आया है।वहीं जमीनें बेचने के ओर बड़े सौदे होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पिछले बजट सत्र के दौरान ही भराड़ीसैंण में स्मार्ट सीटी बसाए जाने की घोषणा की गयी थी.इसके बावजूद ग्रामीणों का बड़ी मात्रा में भूमि बेचना अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है।
जबकि 3 साल पूर्व ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सारकोट को आदर्श ग्राम घोषित किए जाने के बाद अब नजदीकी परवाडी गांव को भी आदर्श ग्राम बनाने की कवायत चल रही है जिसके तहत ग्रामीणों का आर्थिक रूप से समपन्न बनाने को लेकर तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों द्वारा बडी मात्रा में भूमी बेचा जाना सरकार ओर जनता के बीच बढती संवादनहीनता को दर्शाता है।
जिसको लेकर हरीश रावत ने (Uttarakhand Update) से दूरभाष पर हुई बातचीत में कहा कि वर्तमान में भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण भराड़ीसैंण (गैरसैंण) की आत्मा को मारने का काम किया जा रहा है,उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने भराडीसैंण में विधानसभा निर्माण का काम शुरू करने के साथ ही गैरसैंण क्षेत्र की भूमी खरीद फरोख्त पर पूर्ण रोक लगाई थी। लेकिन सरकार बदलते ही भाजपा सरकार ने गैरसैंण को केवल कागजी ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप घोषणा करने के साथ ही गैरसैंण की जमीनों को लूट से बचाने को बनाए नियम कायदों को समाप्त कर दिया। जिसका परिणाम है कि आज बड़ी मात्रा में भोले भाले और गरीब ग्रामीण अपनी जमीनों को कौड़ियों के भाव बेच रहे हैं ।उन्होंने कहा की भराड़ीसैंण में तब उनकी सरकार ने नया नगर बसाए जाने ,अधिकारीयों के आवास निर्माण के लिए भी नोटिफाईड किया हुआ था। साथ ही सचिवालय की स्थापना के लिए 57 करोड रुपए की व्यवस्था भी की थी, जिसके लिए उत्तराखंड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण को इन योजनाओं पर काम करने के लिए अधिकृत भी कर लिया गया था। वही गैरसैंण के व्यवस्थित विकास को लेकर गैरसैंण स्थापना एवं विकास निर्माण निगम की भी स्थापना की गई थी ,जिसके तहत गैरसैंण को अन्य नजदीकी पहाडी नगरों के साथ ही मैदानी क्षेत्रों से जोडने के लिए टनल निर्माण की योजनाएं भी अस्तित्व में लाई जानी थी। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर गैरसैंण में नए नगर की स्थापना की जाती है,तो उसके साथ ही अन्य इकाइयों की स्थापना के लिए भी जमीन की आवश्यकता होगी,ऐसे में अगर गैरसैंण में जमीन ही नहीं बचेगी तो आवश्यक इकाइयों की स्थापना कैसे की जाएगी।
